कोटद्वार में पल्स पोलियो कार्यक्रम की कमान संभाले जीआईसी कुंभीचौड़ के रेडक्रॉस समिति के स्वयंस?
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आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल के पल्स पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन गया है। स्थिति यह है कि आशाओं की हड़ताल के कारण विद्यालयों में गठित रेडक्रॉस सोसाइटी और एनएसएस के स्वयंसेवी नगर निगम में शामिल नए वार्डों में घर-घर जाकर बच्चों को पल्स पोलियो ड्रॉप्स पिला रहे हैं।
आशा कार्यकर्ताओं विभिन्न मांगों को लेकर गत दो माह से भी अधिक समय से हड़ताल पर है। आशाओं की हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने लगा है। पल्स पोलियो अभियान की बात करें तो 17 सितंबर को पल्स पोलियो कार्यक्रम था। कार्यक्रम के एक सप्ताह तक घर-घर जाकर पांच साल तक के बच्चों को पोलिया की खुराक पिलाई जाती थी लेकिन आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण नए वार्डों के करीब 40-50 बूथों में यह कार्यक्रम नहीं हो पाया। अब डब्ल्यूएचओ की पहल पर रेडक्रॉस सोसाइटी के स्कूली बच्चे घर-घर जाकर छोटे बच्चों को पोलिया की दवाई पिला रहे हैं।
कोट
दुगड्डा के प्रभारी चिकित्साधिकारी और पल्स पोलियो के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेंद्र बड़थ्वाल ने बताया कि आशाओं की हड़ताल और कोरोना वैक्सीनेशन अभियान के कारण सितंबर माह में नगर निगम के नए वार्डों में पल्स पोलियो कार्यक्रम नहीं हो पाया था। डब्ल्यूएचओ की रेडक्रॉस सोसाइटी देहरादून से बात हुई है। उनके निर्देश पर जीआईसी कुंभीचौड़ के रेडक्रॉस समिति के बच्चे पोलियो ड्रॉप्स पिलाने का कार्य कर रहे हैं।