दुगड्डा के बाल विकास परियोजना कार्यालय को खुद ही सुविधाओं की दरकार है। स्थिति यह है कि कार्यालय में पेयजल और शौचालय तक की व्यवस्था तक नहीं है, जिससे कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के साथ ही दूरदराज के गांवों से कार्य कराने आने वाले ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों पर सृजित पदों के सापेक्ष कई पद रिक्त चल रहे हैं।
पूर्व में बाल विकास परियोजना कार्यालय दुगड्डा का संचालन किराए के भवन में होता था। साझासैंण में ब्लाक की नई बिल्डिंग बनने के बाद बीडीओ के लिए बनाए गए आवास पर करीब पांच साल पहले बाल विकास परियोजना कार्यालय को शिफ्ट किया गया। लेकिन कार्यालय में अभी तक मूलभूत सुविधाएं नहीं जुटाई गई। स्थिति यह है कि जहां कार्यालय में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं है, वहीं संचार सुविधाएं और बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। दूसरी ओर, कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरी जगह संबद्ध किए जाने से भी लोगों को काम कराने में दिक्कतें आ रही हैं। बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर तैनात जितेंद्र कुमार को जिला कार्यक्रम अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके चलते सुपरवाइजर वसुंधरा रावत को प्रभारी सीडीपीओ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को गत दो वर्ष से यमकेश्वर ब्लाक में संबद्ध किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के 220 पदों के सापेक्ष 219 की नियुक्ति की गई है। यही नहीं आंगनबाड़ी सहायिका के 197 पदों के सापेक्ष छह पद भी रिक्त चल रहे हैं।
कार्यालय में मूलभूत सुविधाएं जुटाने और खस्ताहाल आंगनबाड़ी केंद्रों की सूचना उच्चाधिकारियों को पूर्व में दी जा चुकी है। आंगनबाड़ी केंद्रों में रिक्त पदों के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित की गई है, जल्द ही सभी पद भर लिए जाएंगे।
-वसुंधरा रावत, प्रभारी सीडीपीओ, बाल विकास परियोजना कार्यालय दुगड्डा।