चारधाम यात्रा शुरू होते ही जहां एक ओर यात्रा से जुड़े रूटों के व्यवसायी खुश हैं, वहीं पौड़ी गढ़वाल के ब्रांच रूटों से जुड़े लोगों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। इसकी प्रमुख वजह ब्रांच रूटों पर पूरे साल चलने वाली बसों की कमी है। यहां की 60 फीसदी वाहनों का संचालन लोकल रूटों और 40 फीसदी वाहनों का संचालन चारधाम यात्रा के लिए किया गया है। ऐसे में जीएमओयू कंपनी भी और बसों की व्यवस्था करने में बेबस बनी है।
चारधाम यात्रा में देशभर से उमड़ी यात्रियों की भीड़ के आगे परिवहन व्यवस्थाएं कम पड़ने लगी हैं। वाहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए गढ़वाल में परिवहन व्यवस्था संभालने वाली जीएमओयू ने अपने 95 फीसदी वाहन चारधाम यात्रा में भेज दिए हैं लेकिन इसका खामियाजा गढ़वाल के ब्रांच रूटों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जीएमओयू के पदाधिकारी खुद भी स्वीकार रहे हैं कि यात्रियों के लिए प्रशासन की डिमांड को देखते हुए अतिरिक्त बसें यात्रा में भेजी गई हैं, जिससे चार से पांच बस सेवा संचालन वाले रूटों पर मात्र एक-एक बस सेवा से काम चलाया जा रहा है।
द्वारीखाल के प्रमुख महेंद्र सिंह राणा व पोखड़ा के पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों को होने वाली दिक्कतों का समाधान जरूरी है। लंबी दूरी के वाहनों के चालक छोटे स्टेशनों की सवारियां नहीं बिठा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस ओर संबंधित कंपनी और स्थानीय प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। हाल यह है कि सिलोगी, रिखणीखाल, धुमाकोट रूटों पर मात्र एक सेवा का संचालन खानापूर्ति के लिए हो रहा है। हरिद्वार रूट पर भी बसों की भारी कमी हो गई है। बसें उपलब्ध न होने से कोटद्वार बस अड्डे पर सन्नाटा पसर गया है। लोग महंगे दामों पर जीप टैक्सियों से आवाजाही के लिए मजबूर हैं। रोडवेज डिपो से भी सात से आठ बसें यात्रा व्यवस्था पर भेजी गई हैं। ऐसे हालात में अभी गढ़वाल के ब्रांच रूटों की सवारियों को एक महीना और परेशानी झेलनी पड़ेगी।
ऋषिकेश में यात्रा प्रशासन की मांग पर कोटद्वार से अतिरिक्त बसें भी चारधाम यात्रा पर भेज दी गई है। पांच छह बस पौड़ी समेत मुख्य मार्गों पर आवाजाही करने के लिए लगाई गई है। यात्रा सीजन में देश विदेश से आए लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करना भी शीर्ष प्राथमिकता में आता है। - दीपक नेगी, सहायक यातायात प्रबंधक, जीएमओयू।