उत्तराखंड की आपदा ने भविष्य के लिए कई सीख दी है। आपदा में सबसे ज्यादा तबाह केदारनाथ के पुर्ननिर्माण की कवायद शुरू हो गई है।
इसी संदर्भ में साहित्यकार चंद्र वल्लभ पुरोहित ने कहा कि केदारनाथ में भू सर्वेक्षण के बाद ही आवासीय भवनों के निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण के केदारखंड में वर्णित है कि हेम हेम निधिर हेमो, हिमांबो हिम सुंदरम। अर्थात शिव बर्फ से ढके ही सुंदर लगते हैं। लिहाजा केदारनाथ में बस्ती दो किमी दूर बसाई जाए, जिससे भविष्य में हाल की जलप्रलय से बचा जा सके।
केदारनाथ से लौटे त्रिवेंद्र रावत
शुक्रवार को भी केदारनाथ धाम में दोपहर बाद मौसम खराब हो गया। दिन के बाद धाम में बर्फबारी शुरू हो गई। जिससे शीतलहर चल रही है। हालांकि मौसम खराब होने से पहले पूर्व कबीना मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र रावत चॉपर से केदारनाथ से लौट आए।
महामंडलेश्वरों के साथ के बृहस्पतिवार को केदारनाथ गए रावत बर्फबारी के कारण धाम में ही फंस गए थे। उनको लेने के लिए चॉपर गुप्तकाशी से केदारनाथ नहीं जा पाया। शुक्रवार सुबह थोड़ा मौसम साफ होने पर चॉपर ने केदारनाथ के लिए उड़ान भरी। सुबह लगभग साढ़े नौ बजे रावत केदारनाथ से वापस आ गए। वहीं धाम में धीरे-धीरे बर्फ जमनी शुरू हो गई है। हिमपात के बाद रात को पाला गिर रहा है।