उत्तराखंड आपदा के पांच महीने होने को हैं। ऐसे में सड़क से 18 किलोमीटर दूर पिलंग गांव के ग्रामीण भले आपदा के कहर से नहीं उबर पाए हों, लेकिन दीवाली का पर्व इनके लिए किसी खुशी से कम नहीं है।
आपदा के पांच माह बाद इस गांव के 24 छात्र-छात्राएं अपने गांव पहुंचकर माता-पिता और भाई-बहनों से मिलेंगे। भटवाड़ी प्रखंड के पिलंग गांव के छात्र-छात्राओं को आठवीं पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए 18 किलोमीटर मल्ला और 23 किलोमीटर दूर भटवाड़ी आना पड़ता है।
पांच महीनों से गांव नहीं गए
वर्तमान में इस गांव के 24 छात्र-छात्राएं हाईस्कूल मल्ला और इंटर कालेज भटवाड़ी में अध्ययनरत हैं और गांव में कमरा लेकर रहते हैं। 15 से 20 दिन में एक बार वह अपने गांव जाते थे, लेकिन इस बार आपदा के कारण 18 किलोमीटर का पैदल रास्ता जगह-जगह तबाह होने के कारण ये पांच महीनों से गांव नहीं गए।
हालांकि अभी रास्ता ठीक नहीं हो हुआ लेकिन दिवाली पर बच्चों ने पहाड़ी पगडंडियों से होकर गांव जाने की ठान ली है। सभी छात्र-छात्राएं दिवाली घर पर मनाना चाहते हैं और इस आस में शुक्रवार को गांव के लिए चले गए। छात्र-छात्राएं गांव के जाने के लिए उत्सुक हैं तो उनके परिजन भी अपने लाडलों को देखने के लिए बेचैन हैं।
आपदा से गांव का रास्ता टूट गया था। इसके बाद कई बार घर जाने का मन बनाया, लेकिन मां ने यह कहकर मना कर दिया कि बेटा अभी घर मत आना रास्ता नहीं है। -मनवीर रावत, जीआईसी भटवाड़ी।
मैं पांच महीने बाद घर जा रहा हूं। इतने लंबे समय तक कभी अपनों से दूर नहीं रहा। बड़ी खुशी हो रही है अपने माता-पिता और छोटे भाइयों से मिलने की। -देवराज, जीआईसी भटवाड़ी।