केदारनाथ मंदिर परिक्षेत्र में पड़े सैकड़ों शवों को मंगलवार को भी मुखाग्नि नसीब नहीं हुई, जबकि सरकार ने ऐलान किया था कि सोमवार से लाशों का सामूहिक अंतिम संस्कार शुरू कर दिया जाएगा।
शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए भले ही रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी एनडीआरएफ की टीम दिन भर मशक्कत करती रही, लेकिन खराब मौसम के कारण उसके हौसले भी पस्त हो गए।
उत्तराखंड तबाही की संपूर्ण कवरेज देखने के लिए क्लिक करें
सबसे दुखद स्थिति यह रही कि अंतिम संस्कार का सामान पहुंचाकर लौट रहा एयरफोर्स का एक हेलीकॉप्टर भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 19 लोगों के मारे जाने की आशंका है। आठ लोगों के शव बरामद हुए हैं।
जंगल चट्टी से लेकर केदारनाथ मंदिर परिक्षेत्र में नौ दिनों से पड़े शवों का अंतिम संस्कार करने के सारे प्रयास मंगलवार को भी विफल हो गए।
सामूहिक दाह संस्कार की प्रक्रिया सोमवार को ही शुरू होनी थी, लेकिन न तो मौसम ने साथ दिया और न ही हालात ने।
रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा पूरा तंत्र खराब मौसम के आगे घुटने टेकने को मजबूर हो गया।
पढ़ें: मैं ‘पहाड़’ हूं, पीड़ा में हूं...
हालांकि केदार घाटी में डॉक्टरों और पुलिस कर्मियों को पहुंचाने में एनडीआरएफ की टीम कामयाब रही, लेकिन घाटी में उतरे पुलिसकर्मी शाम तक दाह संस्कार के लिए लकड़ी और अन्य जरूरी सामानों का इंतजार ही करते रहे।
मौसम खराब होने के कारण लकड़ी और अंतिम संस्कार में लगने वाले जरूरी सामान घाटी में नहीं पहुंच सका।
हालांकि घाटी में पहुंचे डॉक्टरों ने लाशों के डीएनए नमूने लेने का कार्य शुरू कर दिया है वहीं पुलिसकर्मी पंचनामा तैयार करने में जुट गए हैं।
तस्वीरों में: जिन्होंने नजदीक से देखा मौत का मंजर
उधर कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जेएस जोशी ने बताया कि केदारघाटी में शवों के दाह संस्कार के सारे इंतजाम कर दिए गए हैं।
जौलीग्रांट अस्पताल से फोरेंसिक विभाग की टीम, 9 डॉक्टर, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की टीम मौके पर पहुंच गई है।