उत्तराखंड में आई आपदा ने न केवल लोगों पर कहर ढाया है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है। उत्तराखंड की क्षतिग्रस्त सड़कों से वन्यजीवों पर खतरा बढ़ गया है।
खराब हालात का लाभ उठाकर शिकारी वन्यजीवों का शिकार कर सकते हैं। खुफिया जानकारी के अनुसार चमोली, उत्तरकाशी, केदारनाथ वैली और पिथौरागढ़ में शिकारियों के मूवमेंट बढ़ने की सूचनाएं मिल रही हैं। इसे देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों को हाई अलर्ट जारी किया गया है।
आमतौर पर मानसून सीजन में शिकारियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। खराब सड़कों के कारण वन विभाग की चौकसी भी कम हो जाती है। वन कर्मी या अधिकारी सुदूर क्षेत्रों में नहीं पहुंच पाते। इसका लाभ उठाकर शिकारी वन्यजीवों का धड़ल्ले से शिकार करते हैं।
उत्तराखंड में 16 जून को आई प्राकृतिक आपदा से सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है। सूत्रों का कहना है कि पूरा महकमा आपदा राहत एवं बचाव कार्य में जुटा है। इस बीच शिकारी मौके का लाभ उठाकर चमोली, उत्तरकाशी, केदारनाथ वैली और पिथौरागढ़ सहित अन्य जिलों के जंगलों में घुस गए हैं।
वनविभाग को भी इसकी भनक लग चुकी है। देखना यह है कि विभागीय अधिकारी वन्यजीवों को बचा पाने में कामयाब होते हैं या फिर शिकारी अपने मंसूबों में।
'चमोली और कुछ जिलों में शिकारियों के मूवमेंट बढ़ने की सूचनाएं मिली हैं। इसको देखते हुए सभी प्रभागीय वन अधिकारियों को हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है, जिससे किसी स्तर पर वन्यजीवों का शिकार न होने पाए। साथ ही शिकारियों की धरपकड़ की जा सके।'
एसके दत्तर, अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव