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राहत लेकर कहां-कहां भटकूं?

Fri, 28 Jun 2013 12:12 PM IST
रजा शास्त्री
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आपदा पीड़ितों के लिए राहत सामग्री लेकर लोग शहर में भटक रहे हैं। बड़े-बड़े दावे करने वाला प्रशासन, समाज सेवी संस्थाओं और संगठनों ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया है।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज

भीलवाड़ा राजस्थान से राहत सामग्री लेकर आए सॉफ्टवेयर इंजीनियर कन्हैया शर्मा और नरेंद्र पाठक बृहस्पतिवार को शहर में देर रात तक भटकते रहे। जानिये उनकी आपबीती उन्हीं की जुबानी।

‘बुधवार दोपहर दो बजे हम भीलवाड़ा से राहत सामग्री लेकर चले थे। सहारनपुर होते हुए बृहस्पतिवार शाम सवा छह बजे देहरादून पहुंचे। निरंजनपुर सब्जी मंडी पहुंचने के बाद हेल्पलाइन नंबर-0135-2722727 पर फोन मिलाया। वहां से जवाब मिला कि इस 9414189333 नंबर पर वर्मा जी से बात कर लो।
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हम कोई सामान नहीं ले रहे हैं
वर्मा जी को फोन किया तो वह बोले-‘वैसे तो हम कोई सामान नहीं ले रहे हैं। चलो पता करके बताता हूं।’ लेकिन इसके बाद उनका कोई जवाब नहीं आया। फोन मिलाया तो नो रिप्लाई।

सब्जी मंडी पर खड़े पुलिसवालों से पूछा तो एक ने कहा कि सहस्रधारा में सामान लिया जा रहा है। दूसरा बोला मंडी में लेते हैं और तीसरे की राय थी कि रायपुर में कहीं राहत सामग्री ली जा रही है।

रास्ते में कई चेक पोस्ट भी पड़े थे लेकिन कहीं पर न तो कोई सूचना पट लगा था और न किसी ने बताया कि राहत सामग्री कहां पहुंचानी है।’ ‘इस दौरान संघ कार्यालय में पप्पन जी से बात की तो बोले कि सामान रखने की जगह नहीं है। शिवसेना के एक जिम्मेदार पदाधिकारी से पहले बात हुई थी तो बोले कि मेरे पास जगह है, पीड़ितों को सामान भिजवा देंगे। फिर बोले कि आते हैं, लेकिन नहीं आए।

कुछ समझ में नहीं आ रहा था
चारों तरफ से निराश होकर निरंजनपुर में खड़े हो गए। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। इसी बीच एक पुलिस वाले ने कहा कि मंडी वाले सामान ले रहे हैं, जाकर पूछो। मंडी में गए तो वहां लोगों ने बताया कि राहत सामग्री वाला कमरा खाली कर दिया है। अब सामान नहीं ले रहे हैं।

यहां से निराश होने के बाद फिर पुलिस वाले के पास पहुंचे तो उसने बताया कि अमर उजाला भी सामान ले रहा है, वहां चले जाओ। इसके बाद हम अमर उजाला आ गए।’

सुबह सामान उतारा जाएगा
यहां से उन्हें जिला प्रशासन के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज रायपुर स्थित कलेक्शन सेंटर का पता बताया गया। रात 10 बजे कन्हैया और नरेंद्र राहत सामग्री लेकर कालेज के गेट पर पहुंचे। वहां खड़े गार्ड ने उन्हें रोक दिया। ‘इस वक्त कोई सामान नहीं लिया जाएगा। ट्रक खड़ा कर दो और सो जाओ। सुबह सामान उतारा जाएगा।’

इस पर नरेंद्र ने कालेज के प्राचार्य को फोन किया। रात में इन्हीं की जिम्मेदारी पर सेंटर था।‘प्राचार्य बोले-गाड़ी खड़ी कर दीजिए। अभी लेबर नहीं है, सुबह उतरवा देंगे।

हमारे यह कहने पर कि सर, हम लोग खुद ही सामान उतार लेंगे। अर्जेंट है, हमें वापस जाना है, तो प्राचार्य ने कहा कि ठीक है गेट पर इंतजार करो।’ रात 11.38 बजे हैं। कन्हैया और नरेंद्र कालेज के गेट पर थके-मांदे इंतजार कर रहे हैं। बूंदे पड़ने लगी हैं, बारिश आने वाली है...।
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