हरीश रावत कैबिनेट की शनिवार को हुई बैठक खनन कारोबारियों और स्टोन क्रेशर संचालकों के लिए राहत लेकर आई। राज्य सरकार ने स्टोन क्रेशर संचालकों के स्तर पर भंडारण में और रिटेल भंडारण वालों को काफी रियायत दी है। मंत्रिमंडल ने पूरे प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए केंद्र से आग्रह करने का भी फैसला किया। वहीं, इसके लिए केंद्र से महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राहत पैकेज की मांग की।
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प्रदेश के भूजल स्तर में आ रही कमी को देखते हुए जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए भी मंत्रिमंडल ने तालाब के विकास पर प्रोत्साहन राशि और बोनस देने का अहम फैसला लिया। राज्य में प्रचलित बोली, भाषाओं के संरक्षण, उन्नयन के लिए गौचर में उत्तराखंड बोली भाषा संस्थान स्थापित किया जाएगा।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि प्रदेश में अभी तक पांच जिले ही सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। मंत्रिमंडल का मानना है कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह व्यवहारिक नहीं है। कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जो सूखा प्रभावित होने के बाद भी इस परिधि में नहीं आ पा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र से पूरे प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने का आग्रह करने का फैसला किया गया।
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रायल्टी दरों में कमी, क्रेशर मालिकों को भी राहत
खनन
- फोटो : प्रतीकात्मक
मंत्रिमंडल की निगाह खनिज भंडारण और स्टोन क्रेशर पर भी गई। फैसले की जानकारी देते हुए अपर सचिव खनन विनय शंकर पांडे ने बताया कि नदियों में खनिज की गुणवत्ता अलग-अलग है, पर रायल्टी की दर एक समान थी। इसको देखते हुए मंत्रिमंडल ने रॉयल्टी की दरों को गुणवत्ता के आधार पर तय करने का निर्णय लिया।
इसके अलावा स्टोन क्रेशर के आवेदनों को स्वीकृत करने का अधिकार भी अब शासन से छीनकर जिलाधिकारियों को दे दिया गया है। यह भी तय किया गया कि स्टोन क्रेशन का नवीनीकरण एक साल की बजाए अब पांच साल में एक बार ही कराना होगा।
स्टोन क्रेशर संचालकों पर सरकार ने इसके अलावा भी मेहरबानी दिखाई। वाणिज्य कर और खनिज विभाग से इनकी अनापत्ति की अनिवार्यता को भी समाप्त करने का फैसला किया। साथ ही खनिज की रॉयल्टी में भी बदलाव किया गया। अभी तक रॉयल्टी एक समान 8.85 रुपये प्रति क्विंटल थी। मंत्रिमंडल ने इस रॉयल्टी को नदियों में उपलब्ध सामग्री के हिसाब से 8.50 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक और सात रुपये प्रति क्विंटल से कम न होने का फैसला किया है।
रिटेल भंडारण करने वालों को भी राहत
हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
रिटेल भंडारण वालों को भी मंत्रिमंडल ने रियायत दी है। रिटेल भंडारण वालों से अब पूर्व की व्यवस्था की तरह तीन हजार रुपये प्रति एक हजार घन मीटर ही वसूला जाएगा। बताया गया कि दो फरवरी 2016 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में खनन नीति में बदलाव के लिए इंदिरा हृदयेश की अध्यक्षता में कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया गया था। सब-कमेटी ने कैबिनेट को अपनी रिपोर्ट दे दी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मंत्रिमंडल ने बदलाव के फैसले किए हैं।
मंत्रिमंडल की निगाह भूजल में आ रही कमी पर भी गई। मंत्रिमंडल ने प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पेयजल विभाग से योजना बनाने को कहा। इसमें प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में किसी व्यक्ति, संस्था, ग्रामसभा, वन पंचायत की ओर से तालाब विकसित किए जाने पर तालाब के आकार और उसकी लागत के अनुरूप एक मुश्त न्यूनतम पांच हजार रुपये से एक लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
तालाब की देखरेख करने पर हर साल बोनस भी दिया जाएगा। बोनस क ी राशि इसमें संग्रहित जल की मात्रा के अनुसार पेयजल विभाग की दरों से तय की जाएगी।
-राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने और केंद्र सरकार से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के समान सहायता मुहैया कराने का आग्रह किया जाएगा।
- स्टोन क्रशर, खनिज भंडारण शुल्क आदि की अनुमति जिलाधिकारी देंगे। अभी तक यह अनुमति शासन से लेनी होती थी।
- स्टोन क्रेशर आदि के लाइसेंस का नवीनीकरण अब हर पांच साल में कराना होगा। अभी तक हर साल नवीनीकरण कराने की व्यवस्था थी।
- बोल्डर, रेता आदि की रॉयल्टी की दर अब गुणवत्ता के आधार पर तय की जाएगी।
- चमोली जनपद के देवाल को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने का निर्णय लिया गया।
- राज्य में प्रचलित बोली, भाषाओं के संरक्षण, उन्नयन के लिए गौचर में उत्तराखंड बोली भाषा संस्थान स्थापित होगा।
- तहसीलों में संविदा पर कार्यरत 150 कंप्यूटर डाटा आपरेटरों का वेतन बढ़ाकर उपनल की दरों के अनुसार किया जाएगा।
-टिहरी जिले के प्रतापनगर में फि क्वाल समुदाय (अनुसूचित जाति-जनजाति को छोड़कर) ओबीसी का दर्जा दिया जाएगा।
- उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग राजपत्रित अधिकारी सेवा नियमावली 2016 को भी दी मंजूरी।
- उत्तराखंड होमगार्ड समूह क और ख सेवा नियमावली 2016 भी हरी झंडी दे दी गई।
- उत्तराखंड सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए नियमावली को मंजूरी।
- कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा के विभागीय ढांचे का भी पुनर्गठन किया।