मंगलमय परिवार की ओर से सभी लोगों के कल्याण, सुख समृद्धि और शांति के लिए आयोजित सामूहिक हवन में बड़ी संख्या में लोगों ने आहुतियां डाली। इस मौके पर संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि पूर्णिमा और अमावस्या को एक छोटा सा हवन हर घर में किया जाना चाहिए। इससे संस्कार संरक्षित रहते हैं।
कथा वाचक संत विजय कौशल महाराज और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के सानिध्य में कनखल स्थित गौतम फार्म में हवन यज्ञ में आहुतियां डाली गई। इस मौके पर संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति यज्ञ की संस्कृति है। इस हवन का पूजा या कर्मकांड से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा को देवताओं का दिन माना गया है और अमावस्या पितरों का दिन है। पितरों के आशीर्वाद से घर में संतान और संपत्ति आती है और देवताओं के आशीर्वाद से घर के संकट मिटते हैं
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जैसे शरीर में नाभि केंद्र का महत्व है, उसी प्रकार संसार में मनुष्य के जीवन में यज्ञ का स्थान है। उन्होंने कहा कि वेदों में गायत्री मंत्र को महामंत्र और यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म कहा कहा गया है। इसलिए यज्ञ की परंपरा को जीवित रखना चाहिए।
महामंडलेश्वर स्वामी उमाकांतानंद सरस्वती ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति यज्ञ के बिना अधूरी है। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन संस्कारों को बताता है।
इस मौके पर गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलपति डॉ. रूप किशोर शास्त्री, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. महावीर अग्रवाल, आरएसएस के व्यवस्था प्रमुख अनिल, प्रांत प्रचारक युद्धवीर, जिला संघ चालक कुंवर रोहिताश्व, विभाग प्रचारक शरद, प्रदेश निरीक्षक विद्या भारती के प्रदेश निरीक्षक डॉ विजयपाल सिंह, आईपीएस जुगल किशोर तिवारी, अपर मेलाधिकारी डॉ. ललितनारायण मिश्रा, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, वाराणसी के जिला पूर्ति अधिकारी दीपक वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।