हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती ने कहा कि हिमालय से गंगा सागर तक समूची गंगा है। भगीरथ जिस मार्ग से गंगा को ले गए उस पूरी धारा को गंगा कहा जाएगा। हरिद्वार में मायापुर से जो एक धारा निकली है वह गंगनहर है।
जगद्गुरु बृहस्पतिवार शाम मिलने गए तीर्थ पुरोहितों के एक प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर रहे थे। प्रतिनिधियों ने इस बार एतराज जताया था कि जगद्गुरु ने हरकी पैड़ी से आगे गंगा को नहर बता दिया है। वार्ता के बाद शंकराचार्य ने पत्रकारों को बताया कि राजा भगीरथ जिस मार्ग से गंगा को ले गए वह पूरा मार्ग गंगा है। सभी धर्मालंबियों को गंगा मैय्या की आराधना करनी चाहिए। हरिद्वार में मायापुर डैम से एक धारा निर्बाध रुप से कनखल की ओर जा रही है, वह भी गंगा है। जो धारा मायापुर से ज्वालापुर की ओर गई है वह गंगनहर है। नीलधारा में बहने वाला जल पवित्र गंगा जल है।
शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू समाज की गंगा के प्रति गहरी आस्था है। गंगा का जल सभी देशवासियों को जीवन प्रदान करता है। गंगा के मूल्यों की रक्षा करने का दायित्व सभी का है। सरकार का परम कर्तव्य है कि गंगा सभी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त हो जाए। हिंदू मात्र को ही नहीं अपितु प्रत्येक देशवासी को प्राण देने वाली गंगा के मूल्यों की रक्षा भारत में न होगी तो और कहां होगी। शंकराचार्य से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में पंडित अखिलेश शास्त्री, उज्ज्वल पंडित आदि शामिल थे।