फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विकासवादी सोच से अतिक्रमण का शिकार हुई वेटलैंड

विज्ञापन
विज्ञापन
विश्व आर्द्रभूमि (वेटलैंड) दिवस पर बुधवार को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से वेबिनार आयोजित किया। वक्ताओं ने कहा कि वेटलैंड बाढ़ नियंत्रण और भूतल जल स्तर को बढ़ाने का कार्य भी करते हैं, लेकिन आज वेटलैंड अतिक्रमण का शिकार हो रही है।
विज्ञापन

विभागाध्यक्ष प्रो. डीएस मलिक ने कहा कि 1971 में ईरान के रामसर शहर में आद्र भूमियों के संरक्षण को लेकर एक सम्मेलन हुआ। जिसमें विश्व के विभिन्न देशों ने आद्र भूमियों को बचाने के लिए चर्चा की गई। भारत आज भी रामसर समझौते पर कार्य किया जा रहा है। कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में जल संरक्षण की बात प्राचीन समय से ही है। उन्होंने कहा कि आद्र भूमि नहीं होती तो पूरा देश मरुभूमि में बदल जाता।
एचएनबी गढ़वाल विवि के प्रो. प्रकाश नौटियाल ने कहा कि आद्र भूमि इस धारा के गुर्दे हैं, जो जल शोधन का कार्य करती हैं। कार्बन की अतिरिक्त मात्रा को सोखने का कार्य भी करते हैं। हिमालयन इंस्टीट्यूट अल्मोड़ा की वैज्ञानिक अंकिता सिंहा ने हिमालय की नदियों और ताल तलैयों के आसपास रहने वाले पक्षियों के आहार व विहार पर चर्चा करते हुए कहा कि खंजन फार्कटेल, रेडस्टार्ट आदि पक्षी गंगोत्री व हर्षिल जैसे क्षेत्रों में प्रजनन करती हैं। जलीय कीड़ों को खाती हैं। हमारे देश की 95 फीसदी नदियां डैम आदि से बाधित हो रही हैं जो जलचरों के लिए नुकसानदायक है। वेबिनार का संयोजन प्रो. दिनेश भट्ट ने किया।
विज्ञापन

लेह-लद्दाख की वैटलैंड पर संकट
जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने लेह और लद्दाख के वैटलैंड पर निर्भर पशु पक्षियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में बहुत सुंदर झीलें लेह लद्दाख में हैं। जहां राजहंस, सुर्खाब और गल्स जैसी पक्षी प्रजातियां प्रजनन करती हैं। किंतु दुर्भाग्य से वहां भी पर्यटन और विकास गतिविधियों के कारण वेटलैंड पर अतिक्रमण हो रहे हैं। सलीम अली सेंटर फॉर आर्निथोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष सिंह ने कहा कि वेटलैंड और तालाब छोटे छोटे कीड़े मकोड़ों, मछली से लेकर पशु पक्षी और जंगली जंतुओं को अपनी फूड चेन श्रृंखला शामिल कर लेता है। प्रो. नमिता, डॉ. संगीता मदान, प्रो. एलपी पुरोहित, डॉ. पवन कुमार, शोधार्थी रेखा, पंकज, शिप्रा, शिखा, इकबाल, डॉ. अर्चना, डॉ. प्रदीप, आशीष, डॉ. विनय सेठी समेत कई लोग जुड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें