ग्राम पंचायतों में सफाई के लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत करोड़ों रुपये से खरीदे गए कूड़ा वाहन और कूड़ेेदान लावारिस हालत में पड़े हुए धूल फांक रहे हैं। जंक लगने से कूड़ेदान खराब होने की कगार पर पहुंच गए। वहीं, ग्राम प्रधानों से चार्ज लिए जाने के बाद से ग्राम पंचायतों में साफ सफाई का कार्य ठप पड़ा है।
तीन वर्ष पहले केंद्र सरकार की ओर से संचालित नमामि गंगे परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में साफ सफाई के लिए अभियान चलाया गया था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ग्राम प्रधानों ने गांव गांव में दीवारों पर ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, ‘एक कदम स्वच्छता की ओर’, जैसे स्लोगन लिखवाएं थे। ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मचारी तैनात किए गए थे। नमामि गंगे परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में साफ सफाई और कूड़ा उठाने के लिए ट्रैक्टर ट्राली और कूड़ेदान खरीदे गए थे। इस पर करोड़ों रुपये खर्च हुए थे। ग्राम प्रधानों ने चार्ज छोड़ने से पहले ही इन्हें ग्राम पंचायतों में एक स्थान पर रखवा दिए थे।
नमामि गंगे परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में साफ सफाई और कूड़ा उठाने के लिए ट्रैक्टर ट्राली और कूड़ेदान खरीदे गए थे। इस पर करोड़ों रुपये खर्च हुए थे। अब इनका इस्तेमाल नहीं होने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत सपना ही बनकर रह गया है।
- अशोक, ग्रामीण
क्षेत्र में कई ग्राम पंचायतों के गांवों में साफ सफाई समय पर नहीं हो रही है। नालियों गंदगी से भरी होने से उफन रही हैं। जिससे मक्खी-मच्छर बढ़ रहे हैं। ऐसे में संक्रामक बीमारी फैलने का अंदेशा बना हुआ है।
- अरविंद, ग्रामीण
नमामि गंगे परियोजना के तहत खरीदे गए कूड़ा वाहन और कूड़ेदान लावारिस हालत में पड़े है। इनमें जंक लग गया है। संबंधित अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है।
सूरजमल, ग्रामीण
पंचायतों में जब से ग्राम प्रधानों से चार्ज छिना है, तब से गांवों में साफ सफाई का कार्य ठप पड़ा है। गांवों में जहां तहां गंदगी पसरी है और मार्गों पर जलभराव हो रहा है।
सोनू, ग्रामीण
ग्राम पंचायतों में नमामि गंगे परियोजना के तहत खरीदे गए ट्रैक्टर ट्राली और डस्टबिन लावारिस हालत में पड़े हैं। इसकी जानकारी नहीं है। संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी।
- जयेंद्र भारद्वाज, खंड विकास अधिकारी, बहादराबाद