10 बजे सरस्वती विद्या मंदिर भेल में वैक्सीन का इंतजार करते स्वास्थ्य कर्मचारी ।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद सोमवार से शुरू हुए नए चरण के टीकाकरण अभियान के प्रति छात्र-छात्राओं में उत्साह देखने को मिला। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से गई व्यवस्थाएं पहले ही दिन धड़ाम हो गईं। कहीं, समय से वैक्सीन नहीं पहुंची तो कहीं बच्चे वैक्सीनेशन करने वाली टीमों के आने का इंतजार करते रहे। पोर्टल पर पंजीकरण न होना भी बाधा बना रहा। स्थिति यह रही कि टीकाकरण अभियान करीब दो घंटे देरी से शुरू हुआ।
कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की दस्तक और तीसरी लहर की आशंका के बीच 15 से 18 वर्ष आयु तक के किशोर-किशोरियों का टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। जनपद में एक लाख 65 हजार 450 लाभार्थियों को टीकाकरण का लक्ष्य शासन की ओर से दिया गया है। जिला प्रशासन इसे एक सप्ताह में पूरा करने का दावा कर रहा है। प्रशासन की ओर से टीकाकरण अभियान शुरू करने के लिए युद्घस्तर पर तैयारियां की जा रही थीं। इसमें रविवार को भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सोमवार से शुरू होने वाले टीकाकरण अभियान को व्यवस्थित ढंग से शुरू करने के लिए लगा रहा। लक्ष्य को पूरा करने के लिए जनपद में 264 स्कूल चयनित किए गए हैं। टीकाकरण के लिए पहले दिन 206 साइट और 20 मोबाइल टीम को मैदान में उतारा गया लेकिन इतनी तैयारी के बाद भी पहले ही दिन टीकाकरण में भारी अव्यवस्था नजर आई।
दरअसल, मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. विद्याशंकर चतुर्वेदी ने स्कूलों को सूचना दी थी कि वैक्सीनेेशन टीम सुबह दस बजे से पहले पहुंच जाएंगी। बच्चों को सुबह नौ बजे से पहले ही बुला लिया जाए। बच्चे तो स्कूल-कॉलेजों में सुबह नौ बजे पहुंच गए लेकिन कहीं वैक्सीनेशन करने के लिए टीमें नहीं पहुंची तो कहीं स्वास्थ्य कर्मी तो पहुंच गए मगर वैक्सीन ही नहीं आई। टीकाकरण के लिए बनाए गए पोर्टल पर भी पंजीकरण करने में भारी दिक्कतें आईं। करीब 12 बजे कुछ स्कूलों में टीकाकरण शुरू हो पाया। कहीं-कहीं पर तो पंजीकरण ही शुरू नहीं होने पर ऑफलाइन पंजीकरण कर टीके लगाए गए। कुछ स्कूलों में एक बजे के बाद टीमें और वैक्सीन पहुंचने पर ही टीके लगने शुरू हो सके।
आईडी पासवर्ड भी दिए टीकाकरण के दिन
स्कूल-कॉलेजों में टीकाकरण के लिए छात्र-छात्राओं का पहले ही पंजीकरण किया जाना था। इसके लिए स्कूल-कॉलेजों से सूची मांगने के दावे किए जा रहे थे ताकि उनका पंजीकरण किया जा सके लेकिन यह दावे हकीकत में कहीं नहीं दिखे। हद तो तब हो गई जब स्कूलों के लिए अलग-अलग बनाई गई आईडी और पासवर्ड टीकाकरण से कुछ देर पहले ही दिए गए। प्रधानाचार्य आईडी पासवर्ड मिलने का इंतजार करते रहे। आईडी और पासवर्ड मिलने के बाद विद्यार्थियों का पंजीकरण शुरू किया गया तब जाकर टीकाकरण शुरू हो सका।
ज्वालापुर में लगे टीके, बाद में होगा पंजीकरण
वैसे तो सभी विद्यार्थियों का टीकाकरण, ऑनलाइन पंजीकरण करने के बाद किया जाना था। ज्वालापुर इंटर कॉलेज में छात्र-छात्राओं का पंजीकरण ही तकनीकी खामियों के कारण नहीं हो सका। इसके कारण बच्चे दोपहर तक टीकाकरण के लिए इंतजार करते रहे। दोपहर में करीब एक बजे सीएमओ डॉ. कुमार खगेंद्र सिंह के निर्देश पर ऑफलाइन टीकाकरण शुरू किया गया। ऑफलाइन टीका लगवाने बच्चों का बाद में डाटा ऑनलाइन किया जाएगा।