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अपनों की दखलंदाजी से भी बढ़ती है दरार

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रेशम से भी नाजुक पति-पत्नी का रिश्ता आपसी मनमुटाव से कम अपनों की दखलंदाजी से ज्यादा टूट रहा है। ऐसे में जिले केे ऐच्छिक ब्यूरो इन टूटे हुए घरों को फिर से जोड़ने में लगा हुआ है। जनवरी से अब तक ऐच्छिक ब्यूरो में आठ मामले पहुंचे हैं। इनमें से दो मामलों में मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं दो पर आपसी सहमति नहीं बनी है। जबकि चार दंपती साथ रहने को राजी हुए।
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पति और पत्नी का सात फेरों के साथ सात जन्मों के संबंध को कभी-कभी शक के कारण टूटने में सात मिनट भी नहीं लगते। वजह बनती है पति और पत्नी के बीच वो। इसके चलते कई बार नौबत तलाक तक पहुंच जाती है। पत्नी अपने पति को छोड़कर मायके में जाकर रहने लगती है। कई मामलों में तो मुकदमा दर्ज कराने तक की नौबत आ जाती है। मगर हरिद्वार जिले का ऐच्छिक ब्यूरो आने वाले हर मामले को गंभीरता से सुनकर टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ने में लगा हुआ है। संवाद
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आखिर में पहुंचता है मामला
किसी भी मामले में पति-पत्नी के बीच विवाद होने के बाद मामला सीधे थाने पहुंचता है। पुलिस भी चाहती है कि किसी का घर ना टूटे। इसके चलते मामले को काउंसिलिंग के लिए महिला हेल्पलाइन भेज दिया जाता है। महिला हेल्पलाइन में होने वाली काउंसिलिंग में भी मुद्दों का निपटारा न होने के बाद आखिर में मुकदमा ऐच्छिक ब्यूरो पहुंचता है। जहां दंपती के रिश्तों में आई खटास को दूर करने का पूरा प्रयास किया जाता है। अधिकतर मामलों में दोनों को मिलवाया जाता है।
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यह लोग है ऐच्छिक ब्यूरो में
महिला ऐच्छिक ब्यूरो में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष व चार सदस्य पति-पत्नी के बीच हुई तकरार के मामले को सुनते हैं। वर्तमान में ऐच्छिक ब्यूरो में एसएसपी की पत्नी सुधा सेंथिल अध्यक्ष है। जबकी एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय उपाध्यक्ष हैं। इसके साथ ही मनोवैैज्ञानिक डॉ. अरुण कुुमार, सेवा निवृत्त उपप्रधानाचार्य रहमान, सेशन कोर्ट के अधिवक्ता संगीता व समाज सेविका मधु भदौरिया सदस्य हैं।
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महिला ऐच्छिक ब्यूरो में आने वाले सभी मामलों को पूरी गंभीरता के साथ सुना जाता है। हर मामले में घर को फिर से जोड़ने का काम किया जाता है। कई बार मामले बहुत ही उलझ जाते हैं, लेकिन फिर भी निष्कर्ष निकाला जाता है।
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सुधा सेंथिल, अध्यक्ष, ऐच्छिक ब्यूरो हरिद्वार
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