पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और संस्थापक सदस्य स्वामी मुक्तानंद का शुक्रवार रात को दिल का दौरान पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को कनखल श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी चिता को योग गुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और अन्य साधु संतों ने मुखाग्नि दी। स्वामी मुक्तानंद के निधन पर बाबा रामदेव भावुक हुए और कहा कि मेरा जीवन उनके उपचारों से भरा है। उन्होंने हमें जो प्रेम और आशीष दिया वह कभी नहीं भुला सकते हैं। वह हमारे संरक्षक थे। सच्चे अर्थों में संन्यासी जीवन व्यतीत कर रहे थे।
66 वर्षीय स्वामी मुक्तानंद ने कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में शुक्रवार रात को अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही शनिवार सुबह से ही दिव्य योग मंदिर में साधु-संतों व उनके अनुयायियों का पहुंचना शुरू हो गया था। शाम चार बजे स्वामी मुक्तानंद की अंतिम यात्रा कनखल श्मशान घाट के लिए शुरू हुई। श्मशान घाट पर उनको याद करते हुए स्वामी संपूर्णानंद ने कहा कि वह कटु सत्य बोलते थे और विनम्रता से अपनी बात कहते थे। स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि उनका जीवन सादगीपूर्ण था और वे संतों के सच्चे प्रतिनिधि थे। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उनका जीवन हम सबको प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वामी मुक्तानंद का चला जाना पतंजलि के लिए अपूरणीय क्षति है। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि वह पुरुषार्थ सेवा विनम्रता सद्भाव और ममता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कहा कि वह पतंजलि योगपीठ के बहुत बड़े स्तंभ और युगपुरुष थे।
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इन संतों ने दी श्रद्धांजलि
आचार्य प्रदुम्न, गुरुकुल चोटीपुरा मुरादाबाद की आचार्य बहन सुमेधा, श्री पंचायती उदासीन अखाड़ा के श्रीमहंत रघुमुनि, कोठारी महंत दामोदर दास, महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्रपुरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतिश्वरानंद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, श्री निर्मल संत पुरा के अध्यक्ष महंत जगजीत सिंह शास्त्री, निर्मल अखाड़े के कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री, महंत राजेंद्र दास, अखिल भारतीय युवा भारत साधु समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवानंद, डॉक्टर स्वामी हरिहरानंद शास्त्री, स्वामी रवि देव, महंत केशवानंद, महंत दिनेश दास, स्वामी आनंद शास्त्री, महंत कृष्णागिरी, पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, महंत ऋषिश्वरानंद सहित बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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लोगों ने की अतिंम यात्रा पर की पुष्प वर्षा
हरिद्वार। दिव्य योग मंदिर से जब ब्रह्मलीन स्वामी मुक्तानंद की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो रास्ते में लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनको अश्रुपूर्ण विदाई दी। अंतिम यात्रा दिव्य योग मंदिर से शुरू होकर संदेश नगर, आनंदमयी मंदिर के सामने, दक्ष मंदिर, होते हुए कनखल श्मशान घाट पर पहुंची।