जनपद में कोरोना अभी बेकाबू नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम की पोल खोलने लगी है। मरीजों को कोविड केयर सेंटर में भर्ती करने के बाद चिकित्सा सुविधा तो दूर बिजली, पानी और खाना तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। बृहस्पतिवार को एक कोविड केयर सेंटर में ऐसी ही अव्यवस्थाएं सामने आने पर मरीजों ने हंगामा कर दिया। हाईवे स्थित एक होटल में बनाए गए कोविड केयर सेंटर में कोरोना संक्रमित 15 मरीजों को दिन में भर्ती किया गया था और रात 11 बजे तक उन्हें खाना तक नहीं नसीब नहीं हुआ। मरीजों के हंगामा करने और एक पार्षद की सक्रियता के बाद रात एक बजे उन्हें खाना नसीब हुआ।
बृहस्पतिवार को करीब 11 बजे रुड़की क्षेत्र से 15 कोरोना संक्रमितों को हाईवे स्थित एक होटल में बनाए कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था। इस सेंटर में न तो कोई डॉक्टर था और न ही पैरामेडिकल स्टाफ। स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीजों को सेंटर के अंदर कर चलती बनी। सुबह से शाम हो गई, लेकिन कोई उनको पूछने तक नहीं आया। रात आठ बजे तक कोई खाने के लिए पूछने नहीं आया तो उन्होंने अधिकारियों के मोबाइल नंबर मिलाने शुरू कर दिए। आठ से दस बजे तक मरीजों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बताया जाता है कि मरीजों ने होटल के कर्मचारियों से पैसे देकर भोजन मांगा तो उन्होेंने भी कोई व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद मरीजों ने हंगामा शुरू कर दिया। किसी ने मोबाइल से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। इसके बाद भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूटी। एक मरीज ने भाजपा पार्षद प्रशांत सैनी को परेशानी बताई। उन्होंने सीएमओ एसके झा को फोन किया तो उन्होंने बैठक में होने का हवाला दिया और फिर फोन तक नहीं उठाया। पार्षद प्रशांत सैनी ने एसीएमओ डॉ. एचडी शाक्य को पूरी जानकारी दी। इसके बाद एसीएमओ सक्रिय हुए, तब जाकर रात एक बजे मरीजों को खाना मिल सका।
गर्मी से भी परेशान रहे मरीज
रात को कई बार क्षेत्र की बिजली गुल हो गई। होटल में जनरेटर होने पर भी उसको नहीं चलाया गया। गर्मी से मरीज परेशान रहे। यह स्थिति अधिकांश कोविड केयर सेंटरों की है। बिजली गुल होते ही गर्मी से परेशान मरीज बाहर आ जाते हैं और ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इस बात की जानकारी नोडल अधिकारियों को भी होती है।
...तो पुलिस अधिकारियों ने भी नहीं सुनी
इसी कोविड केयर सेंटर में रुड़की के कई पुलिसकर्मियों को भी भर्ती किया गया है। जानकारी के अनुसार, इनमें शामिल कुछ लोगों ने अपने अधिकारियों को फोन कर खाना और पानी उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। बताया जाता है कि अधिकारियों ने उनकी भी नहीं सुनी और कोई व्यवस्था नहीं की।
निश्चित तौर पर होटल में कोरोना संक्रमितों को भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध कराने में लापरवाही हुई है। शिकायत मिलने के आधे घंटे के अंतराल में भोजन की व्यवस्था करा दी गई थी। इस मामले में संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी गई है। भविष्य में इस तरह की पुवरावृत्ति ना हो, इसके लिए अलग से जिम्मेदारी तय की गई है। विभागीय अधिकारियों में सामंजस्य की कमी के चलते यह दिक्कत हुई।
-सी रविशंकर, डीएम, हरिद्वार
--
होटल मालिकों को नहीं दिया एक धेला
पहले बनाए गए क्वारंटीन और अब कोविड केयर सेंटर
जोगेंद्र सिंह मावी
हरिद्वार। लॉकडाउन और प्रवासियों की वापसी शुरू होने के बाद से ही प्रशासन ने होटलों को अधिग्रहीत करना शुरू कर दिया था। होटल और गेस्ट हाउस को पहले क्वारंटीन सेंटर बनाया और कोविड केयर सेंटर। चार महीने बीत गए, लेकिन प्रशासन ने होटल मालिकों को एक धेला भी नहीं दिया। ऐसे में होटल मालिक ही कर्जदार हो गए हैं और अब व्यवस्थाएं कराने में असमर्थता जता रहे। कोविड केयर सेंटर में मरीजों की परेशानी की यह भी एक वजह है।
कोरोना के केस आने पर जमातियों को क्वारंटीन करने के लिए अप्रैल में ही क्वारंटीन सेंटर बनाने शुरू कर दिए थे। इसके बाद बाहरी प्रदेशों से बड़ी संख्या में उत्तराखंड के प्रवासियों का आना शुरू हुआ। पहले तो इन लोगाें को सीधे गढ़वाल और कुमाऊं भेजा जा रहा था, लेकिन एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सभी प्रवासियों के सैंपल लेने और शहरों में ही क्वारंटीन करने का आदेश दिया। इसके बाद कलियर के गेस्ट हाउस के साथ हरिद्वार के कई होटल ले लिए गए। कोरोना केस बढ़ने लगे तो अस्पतालों में जगह कम पड़ने पर हरिद्वार, बहादराबाद, रुड़की, मंगलौर तक के होटलों का अधिग्रहण कर कोविड केयर सेंटर बनाए गए। अब तक 63 होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउसों का अधिग्रहण किया जा चुका है। होटल के एक कमरे का किराया 650 से 950 रुपये तक निर्धारित है। मई से अब तक 25 होटलों में लगातार मरीज भर्ती किए जाते रहे हैं। खास बात यह है कि अभी तक किसी भी होटल मालिक को एक पाई का भुगतान नहीं किया गया।
होटल मालिक ने सुनाई पीड़ा
हाईवे स्थित एक होटल के एमडी आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि तीन महीने से लगातार मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में होटल के स्टाफ की तनख्वाह देना, बिजली के बिल, धुलाई, साफ सफाई, रखरखाव के भुगतान लटक गए हैं। प्रशासन के सामने बात रखो तो केवल आश्वासन ही मिलता है।
--
सभी होटल मालिकों के भुगतान न होने की समस्या डीएम के सामने रखी गई थी। उन्होंने ऑडिट की प्रक्रिया चलने के साथ कई बातें बताते हुए शीघ्र भुगतान का आश्वासन दिया था। अब यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री के सामने यह समस्या रखी जाएगी।
-आशुतोष शर्मा, अध्यक्ष, हरिद्वार होटल एसोसिएशन
--
जल्द होगा एक करोड़ का भुगतान : डीएम
डीएम सी रविशंकर का कहना है कि कोविड केयर सेंटर बनाए गए होटलों को जल्द एक करोड़ का भुगतान कर दिया जाएगा। ऑडिट के चलते भुगतान में देरी हुई है। होटल संचालकों की तरफ से जो बिल उपलब्ध कराए गए थे, उनमें भी कई तरह की कमी पाई गई थी। उदाहरण के तौर पर भर्ती कराए गए लोगों की संख्या स्वास्थ्य विभाग की संख्या से मेल नहीं खा रही थी। दूसरा, होटल किराया भी मानक के अनुरूप नहीं था। सत्यापन में काफी समय लगने के कारण भुगतान में थोड़ी देरी हुई है। भुगतान से पहले ऑडिट कराया गया है, ताकि किसी तरह की अनियमितताओं की संभावना ना रहे।