कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर रोकने के लिए लागू कोविड कर्फ्यू के चलते शहरी क्षेत्र में रेस्टोरेंट और ढाबे बंद हैं। रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों का कहना है कि होम डिलीवरी की आस में वे अपने प्रतिष्ठान खोलकर बैठे रहते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऑर्डर कर रहे हैं। इससे उनकी कमर टूट गई है। उनका कहना है कि सड़कों और बाजारों में रेस्टोरेंट-ढाबा लगाकर बैठे लोगों के धंधे पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कोरोना की गाइडलाइन के साथ रेस्टोरेंट और ढाबों पर ग्राहकों के आने की अनुमति देने की मांग की है।
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कोविड कर्फ्यू के चलते एक तो पहले ही काम ठप चल रहा है, लेकिन जो कुछ लोग खाने के लिए आना भी चाहते हैं, उन्हें भी बैठकर खाने की अनुमति न होने से परेशानी हो रही है। रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को गाइडलाइन के तहत अनुमति देनी चाहिए।
-संगीत मदान
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कोरोना संक्रमण से पहले ही धर्मनगरी में श्रद्घालुओं के नहीं आने से सालभर से कुछ कमाई नहीं हो पा रही है। अब फिर से कोविड कर्फ्यू लगने से सड़क पर आने की नौबत खड़ी हो गई है। रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को बचाने के लिए कदम उठाए जाएं।
-दीपक कपूर
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जरूरतमंदों को भोजन कराना आवश्यक सेवा में आता है। इसके बाद भी प्रतिष्ठान में खाने की छूट नहीं दी जा रही है। इससे ग्राहक नहीं आ पा रहे हैं और रेस्टोरेंट व ढाबों पर निर्भर रहने वालों को भी परेशानी आ रही है। सभी को छूट देकर राहत दी जाए।
-अंकित गुप्ता
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रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को एक साल से कोरोना की मार झेलनी पड़ रही है, लेकिन सरकार की ओर से उनके बारे में कुछ नहीं सोचा जा रहा है। अब कम से कम सरकार राहत पैकेज देकर कुछ तो मदद करे ताकि हमारी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हो सके।
-विपुल गुप्ता