मेला अस्पताल में बना एमआरआई सेंटर ।
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मेला अस्पताल में अलग कक्ष तैयार करके करोड़ों रुपये की एमआरआई मशीन स्टॉल हो चुकी है और देर सवेर इसको शुरू कर दिया जाएगा। खास बात यह है कि यहां स्टाफ के नाम पर केवल एक रेडियोग्राफर की तैनाती की गई है। सबसे अहम पद रेडियोलॉजिस्ट समेत अन्य कर्मचारियों की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में सवाल खड़े होने लगे हैं कि कहीं एमआरआई मशीन स्टाफ के अभाव में सफेद हाथी न बनकर रह जाए। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि नई तैनाती होने तक मशीन को अस्पताल के स्टाफ से चलाकर मरीजों को लाभ दिया जाएगा।
महाकुंभ मेले में देश-विदेेश से आने वाले श्रद्धालुओं को एमआरआई की सुविधा देने के लिए साढ़े नौ करोड़ से मेला अस्पताल में मशीन लगाने के लिए बजट जारी हुआ था। मशीन अब मेला संपन्न होने के साढ़े सात माह बाद स्थापित हुई है। बुधवार को मशीन का उद्घाटन होना था, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की कार दुर्घटनाग्रस्त होने से वह नहीं हो सका। अब सवाल यह है कि यदि पर्याप्त स्टाफ नहीं मिला तो इसका लाभ मरीजों को मिलेगा भी या नहीं। मालूम हो कि मेला अस्पताल में पहले से कई स्वास्थ्य सुविधाएं होने के बाद भी स्टाफ नहीं होने के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यह होता है स्टाफ
मशीन चलाने के लिए कम से कम एमआरआई यूनिट में एमआरआई टेक्निशियन या रेडियोग्राफर, एक स्थायी रेडियोलॉजिस्ट, आगंतुक कर्मचारी, एक वार्ड ब्यॉय की जरूरत होती है। यहां मशीन चलाने के लिए रुड़की जिला संयुक्त अस्पताल से अस्थायी तौर पर रेडियोग्राफर तो भेज दिया गया है। अन्य स्टाफ नहीं है। हालांकि, रेडियोलोजॉजिस्ट की व्यवस्था महिला अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट से की गई है।
एमआरआई मशीन को चलाने के लिए रुड़की से ट्रांसफर कर एक कर्मचारी की तैनाती कर दी गई है। रेडियोलॉजिस्ट और अन्य स्टाफ जब तक नहीं आएगा, तब मेला अस्पताल के स्टाफ से एमआरआई मशीन का संचालन किया जाएगा।
- डॉ. राजेश गुप्ता, सीएमएस, मेला अस्पताल