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यहां हुआ था भगवान शिव की सती का जन्म

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माता शीतला। - फोटो : HARIDWAR
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सनातन धर्म में आदि शक्ति को मातृ स्वरूप मानकर उनकी अनेक रूपों में पूजा की जाती है। इन्हीं में से एक हैं भगवती शीतला माता जिन्हें आरोग्य और स्वच्छता की देवी माना जाता है। धर्मनगरी स्थित शीतला माता मंदिर में श्रद्धालु संतान की आरोग्य और दीर्घायु के लिए पूजा-अर्चना की जाती है।
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भगवान आशुतोष की ससुराल कनखल स्थित शीतला देवी मंदिर को राजा दक्ष की कुल देवी के रूप में भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में पूजा-अर्चना करने से शीतला माता की अनुकंपा से लोग रोगमुक्त हो जाते हैं। वैसे तो साल भर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं लेकिन शीतला अष्टमी पर माताएं संतान की आरोग्यता के लिए बड़ी संख्या में शीतला माता का पूजन करने मंदिर आती हैं। साल के दोनों नवरात्रों में तो पूजा-अर्चना को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
नवरात्र में लगते हैं 56 भोग
नवरात्र में यहां हर रोज 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राकेश गिरि बताते हैं कि हर रोज पंचामृत से माता का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने कहा कि मंदिर में माता का पूजन करने से समस्त मन वांछित फल की प्राप्ति हो जाती है। खास तौर पर संतान की आरोग्य को श्रद्धालु माता की पूजा करते हैं।
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मंदिर की धार्मिक मान्यता
तीर्थनगरी हरिद्वार स्थित शीतला माता मंदिर से कोई भक्त खाली हाथ नहीं जाता। यहां संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए पूजा अर्चना की जाती है। यह मंदिर कनखल में दक्ष मंदिर के पास स्थित है। शीतला देवी माता को राजा दक्ष की कुल देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि राजा दक्ष ने अपनी कुल देवी शीतला माता की कठोर तपस्या की थी और मनोकामना पूरी होने पर इस मंदिर में देवी सती ने जन्म लिया था।
ऐसे पहुंचें शीतला मंदिर
श्रद्धालु रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर पहुंचकर यहां से ऑटो या ई-रिक्शा के माध्यम से कनखल स्थित शीतला माता मंदिर पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही आसपास के जिलों से यात्री अपने वाहनों से भी यहां पर पहुंचते हैं।
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