फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कान्हा की गायों को हरि की नगरी में नहीं मिल रहा रखवाला

विज्ञापन
विज्ञापन
देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सनातन धर्म के आधार गौ, गंगा और गीता का संदेश देने वाली धर्मनगरी हरिद्वार में ही गौ और गोवंश को कोई देखने वाला नहीं है। कुंभ नगरी की हर सड़क, गली और मैदानों में हिंदू धर्म की पूजनीय गौ माता को दर दर भटकते देखा जा सकता है। हरिद्वार और आसपास के इलाकों में कई गौशालाएं खुलने के बाद भी इनको आसरा नहीं मिल पाया।
विज्ञापन

देशभर के साथ-साथ आज हरि की नगरी में गोपाष्टमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। लोग गौशालाओं में जाकर पूजन करेंगे और फिर उसकी सेल्फी लेकर फेसबुक पर भी अपलोड करेंगे। इसके बाद सालभर के लिए इन गायों को भूला दिया जाएगा। हरिद्वार में देहरादून जिले की सीमा हरीपुर कलां से लेकर कनखल तक सैकड़ों गाय सड़कों पर भटकती दिखाई देंगी। यह नजारा भूपतवाला, खड़खड़ी, भीमगोड़ा, मध्य हरिद्वार के सभी इलाकों, पॉश कालोनियों में दिखाई देता है। सड़कों पर भटक रही गांवों की व्यथा को न सरकारी सिस्टम सुन रहा और न गाय के नाम पर प्रवचन करने वाले। गायों का दूध बेचकर अपनी रोजीरोटी चलाने वालों की भी यही स्थिति है। दूध निकालने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। जब दूध देने की काबिल नहीं रहती तो उसे कहीं दूर जाकर छोड़ दिया जाता है। संवाद
एक तरफ तो हम गायों को पूज रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यह गाय अपना पेट भरने के लिए सड़कों पर ठोकरें खा रही हैं। एक दिन गाय को पूजने से कुछ नहीं होगा।
- पार्थ, विवेक विहार
यदि हम ठान लें कि गाय को बेसहारा नहीं होने देंगे और प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में एक गाय पाले तो सड़कों पर बेसहारा नहीं घूमेंगी। इसी से हमारा गोपाष्टमी का व्रत भी सफल होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

- अनिकेत गिरी, उत्तरी हरिद्वार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें