22 मार्च यानी आज विश्व जल दिवस है। जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है इसके बावजूद पानी की बर्बादी नहीं रुक रही है। पाइप लाइनों में लीकेज हो या घरों में हर रोज लाखों लीटर पानी बेवजह नालियों में बह जाता है। हर जगह कंकरीट के जंगल खड़े होने से भूजल स्तर भी लगातार गिर रहा है।
हरिद्वार गंगा नदी किनारे बसा है। बावजूद इसके गर्मियां शुरू होते ही पेयजल संकट गहरा जाता है। भूमिगत जलस्तर गिरने से हैंडपंप सूख रहे हैं। हैंडपंप और ट्यूबवेल की बोरिंग की गहराई लगातार बढ़ रही है। भगवानपुर में 20 साल में 30 फुट भूमिगत जलस्तर गिर गया है जबकि लालढांग का जलस्तर 150 फुट तक पहुंच गया है। हरिद्वार में लगातार गिरता भूमिगत जल स्तर चिंताजनक है। ऐसे में जल संकट गहराने से रोकने के लिए जागरूक होकर आज अगर जल बचाने की पहल न की गई तो कल संकट से सभी को जूझना पड़ेगा। पेयजल निगम की यांत्रिकी शाखा के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में भगवानपुर ब्लॉक में दो दशक में सबसे ज्यादा 30 फुट तक भूमिगत जल स्तर गिरा है। वर्तमान में यहां 70 फुुट तक जल स्तर है जबकि इससे पहले 40 फुट तक होता था। वहीं लालढांग गंगा का ऊपरी इलाका है और यहां 150 फुट पर भूमिगत जलस्तर है। हरिद्वार और आसपास के इलाकों की बात करें तो यहां 30 से 40 फुट नीचे तक जलस्तर है। लगातार घटते जल स्तर के पीछे जल संचय न होना है।
पांच फीसदी हैंडपंप सूखे
जिले भर में लगभग 23,517 हैंडपंप लगे हुए हैं। इनमें लगातार भूमिगत जलस्तर गिरने के कारण पुराने समय से लगे करीब पांच फीसदी हैंडपंप सूख गए हैं। इसके अलावा हैंडपंप और ट्यूबवेल की बोरिंग करने में काफी समय लगने से परेशानी भी खड़ी होती है।