‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की कहावत हरि के द्वार हरिद्वार में प्रवचनों तक सीमित है। शहर में भीख मांगकर पेट भरने वाले निराश्रित और बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों के दरवाजे भी बंद हैं। रैन बसेरों में जगह, बिस्तर और बेड की कमी नहीं है। इसके बाद भी यहां रुकने के लिए बनाए गए नियम कानून आड़े आते हैं। रैन बसेरों में रात के समय ठहरने के लिए आधार या अन्य परिचय पत्र अनिवार्य होता है। ऐसे में निराश्रित खुले आसमान के नीचे कहीं फुटपाथ और डिवाइडर तो कहीं पुलों की ओट पर रात बीताते हैं। इनमें बच्चों से लेकर महिलाएं और बुजुर्ग भी हैं। ठंड में रातभर ठिठुरते बेघरों की प्रशासन भी अनदेखी कर रहा है।
हरिद्वार में भिक्षावृत्ति पर रोक है। बावजूद हरिद्वार में हरकी पैड़ी से लेकर अधिकतर घाटों, प्रमुख बाजारों, रोडवेज बस अड्डे और रेलवे स्टेशनों पर सर्वाधिक भिक्षावृत्ति होती है। इनके अलावा कई दिव्यांग और मानसिक कमजोर और बेघर भी हरिद्वार में भटकते नजर आते हैं। निराश्रितों के लिए रैन बसेरे बने हैं। सीसीआर टावर के पास ही महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग रैन बसेरे हैं। रैन बसेरों में पर्याप्त बेड क्षमता और ओढ़ने-बिछाने के लिए बिस्तर भी हैं। लेकिन रैन बसेरों में निराश्रितों को प्रवेश नहीं मिलता है। प्रवेश के लिए आधार कार्ड या कोई भी दूसरा परिचय प्रमाणपत्र की अनिवार्यता है। यदि भिक्षावृत्ति करने वाले के पास प्रमाणपत्र होने के बाद भी उसको इंट्री नहीं दी जाती है। इसलिए अधिकांश बेघर लोग गत्तों और पॉलिथिन का बिस्तर बनाकर रात गुजारते हैं।
शाम सात बजे खुलता गेट, सुबह आठ बजे बंद
रैन बसेरों का संचालन भारत स्काउट एवं गाइड की ओर से किया जाता है। रैन बसेरे शाम को सात बजे खुलते और सुबह आठ बजे दरवाजे बंद हो जाते हैं। रैन बसेरों में केवल यात्रियों की ठहरने की व्यवस्था है। इसका उल्लेख तक किया है। कोई भी निराश्रित का प्रवेश नहीं है। रैन बसेरों में शौचालय की सुविधा नहीं है।
पुरुष रैन बसेरे में 25 तख्त (बेड) लगे हैं। बिछाने और ओढ़ने के बिस्तर एवं कंबल हैं। चारपाई के अलावा अतिरिक्त कंबल भी हैं, ताकि 25 से अधिक लोग पहुंचने पर उनको जमीन पर बिछाकर लेटाया जा सके। बिना आधार कार्ड या परिचय पत्र के किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं देते हैं। रैन बसेरे में औसतन चार से पांच लोग ही रुकते हैं।
- रणवीर कपूर, केयर टेकर रैन बसेरा
- महिला रैन बसेरे में 40 तख्त लगे हैं। प्रतिदिन औसतन छह से आठ महिला यात्री ही उसमें ठहरती हैं। यहां भी ठहरने के लिए आधार कार्ड या दूसरा कोई भी परिचय पत्र जरूरी है। यात्री का पूरा विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। बिना परिचय पत्र और हरकी पैड़ी एवं आसपास भीख मांगने वालों को नहीं ठहराया जाता है।
- मीरा देवी, केयर टेयर, रैन बसेरा