इस बार गृह परीक्षाएं भी बोर्ड की तर्ज पर कराई जा रही है लेकिन विद्यार्थियों का सही डाटा जुटाना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। हालांकि विभाग का दावा है कि व्यवस्थित ढंग से गृह परीक्षाओं को संपन्न कराया जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से अब तक गृह परीक्षाओं को स्कूल स्तर पर कराया जाता था जिसमें स्कूलों की तरफ से प्रश्न पत्र तैयार कर अपनी सुविधा के अनुसार गृह परीक्षाएं कराई जाती हैं। उन्हें विभाग की ओर से जारी की गई अंतिम तिथि तक गृह परीक्षा कराकर रिजल्ट जारी करना होता था लेकिन इस बार कक्षा तीन से 11वीं तक की गृह परीक्षा स्कूलों के बजाय प्रदेशस्तर पर कराई जा रही है। नौ मार्च से शुरू होने वाली गृह परीक्षाएं 21 मार्च तक संपन्न कराई जाएंगी। इसमें कक्षा तीन से आठ तक के छात्र-छात्राओं को एक कैटेगरी में रखा गया है। नौवीं और 11वीं को दूसरी श्रेेणी में रखा गया है। इन गृह परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र का प्रारूप एक होगा। गृह परीक्षाओं के विषयों की तिथियां और समय भी एक होगा। इससे एक साथ बोर्ड परीक्षाओं की तरह गृह परीक्षाओं को स्कूलों में कराया जाएगा लेकिन शिक्षा विभाग के लिए बड़ी समस्या स्कूलों में पंजीकृत छात्र-छात्राओं की सही संख्या को जुटाना हो रहा है। दरअसल, विभिन्न विषयों और कक्षाओं की संख्या सही नहीं मिलने पर दोबारा से चार्ट बनाना पड़ा। दोबारा बनाए गए चार्ट में भी कुछ स्कूलों की ओर से भेजी गई संख्या का सही आंकड़ा दर्ज नहीं हो पा रहा है। ऐसे में परीक्षाओं के प्रश्न पत्र जारी करने से गृह परीक्षाएं करने की व्यवस्थाएं गड़बड़ा सकती हैं।
गृह परीक्षाओं को लेकर सभी तैयारियां कर ली गई हैं। कुछ विषयों की संख्या मांगी जा रही है। वह भी आजकल में पहुंच जाएगी। बहुत ही बेहतर और व्यवस्थित ढंग से गृह परीक्षाएं संपन्न कराई जाएंगी। - एसपी सेमवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार