अस्थि विसर्जन (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया।
श्रीगंगा सभा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना को रद्द करने की मांग की है। इसको लेकर एक ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को दिया। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को संस्कृत अकादमी की प्रस्तावित अस्थिप्रवाह से संबंधित मुक्ति योजना को रद्द करने का आश्वासन दिया है।
रविवार को श्रीगंगा सभा हरिद्वार का प्रतिनिधिमंडल देहरादून पहुंचा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके कैंप कार्यालय पर मुलाकात की। इस दौरान गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा ने कहा कि संस्कृत भाषा व संस्कृत शिक्षा के उत्थान के लिए गठित संस्कृत अकादमी अपने उद्देश्य से भटककर पुरोहितों की ओर से संपन्न कराए जाने वाले धार्मिक कर्मकांडों में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने कहा कि सदियों से चली आ रही परंपराओं का पालन करते हुए तीर्थ पुरोहित ही अपने यजमानों के अस्थि विसर्जन व अन्य धार्मिक कर्मकांड संपन्न करा रहे हैं।
हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों के पास उपलब्ध बहियों में यजमानों का पीढ़ी दर पीढ़ी पूरा ब्योरा दर्ज है। धार्मिक कर्मकांड कराने के लिए आने वाले यजमानों को सभी सुविधाएं भी पुरोहितों की और से उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन संस्कृत अकादमी पुरोहितों के अधिकारों पर कुठाराघात करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अकादमी की मुक्ति योजना पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि संस्कृत अकादमी धार्मिक कर्मकांडों का व्यवसायीकरण करना चाह रही है। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुरोहितों समाज शास्त्र सम्मत विधि से सभी धार्मिक कर्म संपन्न कराते हैं। संस्कृत अकादमी की योजना किसी भी तरह से शास्त्र सम्मत नही है। इस दौरान स्वागत मंत्री डॉ. सिद्धार्थ चक्रपाणि, समाज कल्याण मंत्री नितिन गौतम, प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान, सचिव शैलेष मोहन, सचिव अवधेश पटुवर, उज्ज्वल पंडित, विकास प्रधान आदि शामिल रहे।