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शिक्षाविद एवं साहित्यकार कमलकान्त का निधन

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डॉ कमलकांत बुधकर। फाइल फोटो - फोटो : HARIDWAR
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साहित्यकार, शिक्षाविद एवं पत्रकार डॉ. कमलकांत बुधकर का रविवार सुबह हरिद्वार स्थित आवास पर निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे। खड़खड़ी श्मशान घाट पर उनके बड़े बेटे सौरभ और पल्लव बुधकर ने चिता को मुखाग्नि दी।
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डॉ. कमलकांत हरकी पैड़ी पर गंगा के बीच स्थित गंगा मंदिर के अधिष्ठाता भी थे। गुरुकुल कांगड़ी विवि हिंदी पत्रकारिता विभाग के प्रो. डॉ. बुधकर ने पत्रकारों की एक पीढ़ी तैयार की। श्रवणनाथ नगर स्थित उनका आवास दशकों तक हिंदी साहित्य का गढ़ बना रहा। प्रभाकर माचवे, हरिवंश राय बच्चन, नागार्जुन, कार्टूनिस्ट काक, बाल कवि बैरागी, राजेंद्र माथुर, कन्हैयालाल नंदन, सच्चिदानंद वात्स्यायन जैसी साहित्य जगत की हस्तियां हरिद्वार आने पर उन्हीं के घर ठहरती थीं। हिंदी के पाणिनि आचार्य किशोरीदास वाजपेयी पर दूरदर्शन से फिल्म बनवाकर कमलकांत ने उनका नाम पूरे देश में फैलाया। आकाशवाणी और दूरदर्शन के आंखों देखा हाल सुनाने वाले पैनल में बुधकर का नाम शामिल था।
डॉ. बुधकर ने एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी। साहित्य के विद्वानों के साथ कई देशों की साहित्यिक यात्राएं की। कवि सम्मेलनों की वे शान रहे। गुरुकुल कांगड़ी विवि से पहले सहारनपुर के महाराज सिंह कालेज और हरिद्वार के एसएमजेएन में अध्यापन किया।
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बुधकर की आंखों से देखेंगे दो लोग
कमलकांत बुधकर ने हरिद्वार के रामशरण चावला को नेत्रदान यज्ञ में भाग लेने के लिए प्रेरित किया था। आज उन्हीं रामशरण ने एम्स से आई टीम के साथ बुधकर के दोनों नेत्र प्राप्त किए। नेत्रों को एम्स ले जाकर दो नेत्रहीनों को रौशनी प्रदान की गई।
पत्रकारों ने शोक संवेदना जताई
डॉ. कमलकांत बुधकर के निधन से मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मीडिया कर्मियों के अलावा जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय ने शोक जताया है। कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप ने उनके निधन पर शोक जताया है।
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