पुण्य और पाप के अक्षय रहने का पर्व अक्षय तृृतीया पंचपुरी में श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। श्रद्धालुओं ने दिनभर का व्रत रखकर भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना की। घरों में स्नान करने के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देकर जौ से बने सत्तू का दान किया। अक्षय तृतीया पर अनेक ग्रंथों के पाठ घरों पर किए गए।
लॉकडाउन के चलते अक्षय तृतीय के दिन होने वाला गंगा स्नान नहीं हो पाया। परिणाम स्वरूप लोगों ने घरों पर ही स्नान किया। इस दिन लक्ष्मी नारायण और भगवान परशुुराम की पूजा की गई। परशुराम के रूप में विष्णु ने अक्षय तृतीया के दिन ही अवतार लिया था। यह विष्णु का रुपावतार था। परशुराम की जयंती पर होने वाले समारोह न होने के कारण घरों में ही परशुराम का अर्चन किया गया। इस दिन सत्तू का दान पुण्यकारी माना जाता है।
पंचपुरी के अनेक घरों में शाम के समय सत्तू पीकर व्रत खोले गए। यद्यपि अक्षय तृतीया अनेक कार्यों के शुभारंभ का पर्व है, लेकिन कोरोना के चलते कोई भी मांगलिक कार्य या शुुभ कार्य नहीं हो पाया। अक्षय तृतीया पर्व पर हरकी पैड़ी और कुशावर्त पर गंगा पूजन के कार्य भी प्रतीकात्मक रूप से एक-एक पंडित ने पूरे किए।