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चौरतफा महंगाई की मार, जनता हुई लाचार

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महंगाई आसमान छू रही है। महंगाई के बोझ से आम आदमी का घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। एक महीने में सब्जी, आटा-चावल, दाल और साबुन से लेकर हर जरूरत के सामान की कीमतें बढ़ गई हैं। जिनकी कीमतें नहीं बढ़ी हैं उनके वजन में कटौती हो गई है।
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लोगों को महंगाई से राहत मिलती नहीं दिख रही है। बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस से लेकर किचन की हर जरूरी सामग्री पर महंगाई की आग लगी हुई है। अब बच्चों के स्कूल खुल गए हैं। बच्चों की फीस, बस किराया से लेकर नए कोर्स महंगा हो गया है। अधिकतर परिवारों में आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया जैसे हालात हो गए हैं। महंगाई के अतिरिक्त बोझ से निपटने के लिए परिवारों ने अपने ही खर्चों और खाने-पीने में कटौती शुरू कर दी है। दवाएं भी महंगी हो गई हैं।
सब्जी के दामों में उछाल प्रति किलो
सब्जी-अब-पहले
हरी मिर्च-120-70
करेला-100-80
भिंडी-100-80
गोभी-40-30
बैंगन-40-30
खीरा-40-20
आलू-14-12
लौकी-30-20
किराना की कीमतों में उछाल प्रति किलो सामग्री अब पहले
पिसी मिर्च-280-200
सरसों का तेल-180-160
आटा -30-25
चावल (बासमती)-85-60
चावल -40-35
दवाइयों के दामों में बढ़ोतरी
दवाई-अब-पहले
एमलोप्रेस एटी-148-135
टर्बिना फोर्स 91-85
पेनटाप (40)-174-89
डिस्प्रिन -11- 07
इवीओन - 33-25
लगातार बढ़ती महंगाई से घर चलाना बहुत मुश्किल हो गया है। आमदनी अपनी जगह है, लेकिन खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए।
- ईशा शर्मा
बच्चों की स्कूल की फीस से लेकर बसों का किराया, कोर्स सब महंगा हो गया है। गैस और सब्जी, राशन का सभी सामग्री महंगी होने से परेशानी खड़ी होने लगी है।
- जेपी सिंह
- आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया जैसे हालात हो गए हैं। महंगाई के कारण खर्चे बेहद बढ़ गए। खर्चों और अपने खाने-पीने और अन्य गैर जरूरी सामान की खरीद में कटौती करनी पड़ रही है।
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- अरविंद कुमार
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