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अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन: जगद्गुरु बोले- पीड़ित के जख्म पर मरहम लगाने का काम करें ज्योतिषी

Sun, 25 Oct 2026 11:01 PM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

सम्मेलन में देशभर से आए ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों तथा ज्योतिषीय संकेतों पर अपने विचार रखे।
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अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि राष्ट्रहित की सोचने वाला व्यक्ति स्वहित की बात नहीं सोचता है। ज्योतिष पीड़ित के जख्म पर मरहम लगाने का काम करता है। यदि ज्योतिषी धनार्जन कर रहा है या मिथ्या बातें करके भ्रमित कर रहा है तो वह गलत है। उन्होंने यह बात कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में विश्व युद्ध की आशंका और ज्योतिषीय चिंतन विषय पर आयोजित एक दिवसीय अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन में कही।

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सम्मेलन में देशभर से आए ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों तथा ज्योतिषीय संकेतों पर अपने विचार रखे। सम्मेलन में किसी विश्व युद्ध की निश्चित भविष्यवाणी से बचने पर जोर दिया गया। जगद्गुरु ने कहा कि यदि इस संगोष्ठी की सफलता की बात होगी तो इसमें किसी नेता या अभिनेता नहीं राष्ट्र के साथ विश्व के समभाव सद्भाव की बात की जानी चाहिए।
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सम्मेलन में जगद्गुरु ने ज्योतिष शास्त्र को भारतीय ऋषि-मुनियों की प्राचीन विद्या बताया। कहा कि ज्योतिष का उद्देश्य भविष्य के संकेतों का अध्ययन करना ही नहीं है। इसका लक्ष्य मानव समाज को विवेक, सकारात्मक चिंतन और धर्म के मार्ग पर प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष और टोटके सनातन के एक अंग हैं, इन्हें स्वीकार करना होगा।
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उन्होंने प्रख्यात ज्योतिषी केए दुबे पद्मेश को ज्योतिष के उत्थान के लिए संघर्ष करने वाला सिपाही बताया। उन्होंने लेखराज शर्मा, लाल किताब के लेखक जीडी वशिष्ठ, रमेश चंद द्विवेदी और आचार्य रमेश सेमवाल समेत अन्य ज्योतिषियों के कार्यों की सराहना की। सम्मेलन में ईरान, इस्राइल, रूस और यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संघर्षों पर भी विमर्श हुआ।
सम्मेलन में वरिष्ठ ज्योतिषविद केए दुबे पद्मेश, डॉ. लेखराज शर्मा, जीडी वशिष्ठ और आचार्य अनिल वत्स आदि विद्वानों ने ग्रहों के गोचर और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा की। उन्होंने ज्योतिषीय गणनाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर गंभीर शोध की आवश्यकता बताई। महामंडलेश्वर करौली शंकर ने आध्यात्मिक चिंतन और विश्व शांति के महत्व पर प्रकाश डाला।

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