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शिक्षण संस्था को खुदबुर्द करने को षड़यंत्र रच रहे कथित महंत: मिश्र

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के शिक्षकों ने प्रबंध समिति पर लगे गबन के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने मुकदमा दर्ज कराया है, वे आश्रम के घोषित महंत नहीं हैं, प्रशासन ने केवल उन्हें देखरेख के लिए बैठाया है। उसका मकसद है कि आश्रम एवं जुड़ी संस्थाओं को खुदबुर्द कर अवैध तरीके से धन कमाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्वामी पर मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
शनिवार महाविद्यालय परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. निरंजन मिश्र ने बताया कि श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना 13 अप्रैल-1965 में अवधूत मंडल आश्रम के महंत स्वामी गुरुचरण दास महाराज ने की थी। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार महाविद्यालय को अनुदान प्रदान करती थी। तत्कालीन केंद्र सरकार ने सन-1978 में महाविद्यालय को आदर्श योजना के तहत शामिल करते हुए आदर्श महाविद्यालय में शामिल किया। योजना के नियम के अनुसार प्रशासनिक व आर्थिक कार्य प्राचार्य के अधीन किए और आश्रम प्रबंधन ने 99 साल की लीज पर दे दी। जिसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक महाविद्यालय चलने तक भूमि महाविद्यालय की होगी। डॉ. निरंजन मिश्र ने बताया कि 14 जून को प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम की व्यवस्था देख रहे स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष, सचिव, प्राचार्य समेत पांच लोगों के खिलाफ ज्वालापुर कोतवाली में गबन आदि का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। जबकि पुलिस ने शिकायत पर फरवरी महीने में जांच कराई तो सभी कार्य नियमानुसार चलते हुए मिले, लेकिन बाद में स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने पुलिस पर दबाव बनवाकर फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज करवा दिया। उन्होंने कहा कि आश्रम की व्यवस्था देख रहे स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने अपने को आश्रम का महंत बताया तो प्राचार्य डॉ. भोला झा ने आश्रम के मातृसंस्था होने के चलते हुए नियमानुसार मिलने वाली धनराशि प्रत्येक वर्ष के धनराशि सात लाख रुपये के हिसाब से मांगा। साथ ही नई समिति में सदस्य नियुक्त करने के लिए भी नाम मांगा, लेकिन उन्होंने न तो धनराशि जारी की और न ही किसी सदस्य का नाम भेजा। डॉ. रविंद्र कुमार ने कहा कि पूरे मामले में कानूनी सलाह ली जा रही है, शीघ्र ही स्वामी पर मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
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जब मैं उनकी नजर में आश्रम का महंत एवं प्रबंधक नहीं था तो प्रत्येक कार्यक्रम में क्यों बुलाते थे और फिर मातृसंस्था के की ओर से जारी होने आवर्ती मदों के बदले में धनराशि क्यों मांगी। महाविद्यालय के प्राचार्य ने षड्यंत्र पूर्वक समिति बदली। पुलिस ने जांच करने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया है।
- स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज, महंत, प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम।
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