हरिद्वार। छात्रवृत्ति घोटाले की परत खुलने के बाद जिले की कई नामी शिक्षण संस्थानों की साख पर भी बट्टा लगा है। शिक्षण संस्थानों के संचालकों को भी गलत दृष्टि से देखा जाने लगा है।
एसआईटी छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े चेहरों को रोजाना बेनकाब कर रही हैं। कई शिक्षण संस्थानों के संचालक जेल के पीछे पहुंच चुके हैं। यह घोटाला जहां प्रदेश सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है, ठीक वैसे ही आमजन भी इस घोटाले में शामिल चेहरों के बेनकाब होने से हतप्रभ है। दरअसल, शिक्षण संस्थानों के संचालन के कार्य को कभी बेहद अच्छी नजर से देखा जाता है। संस्थानों के संचालकों का भी समाज में ठीक ठाक रुतबा रहा है। विशेषकर बुद्धिजीवी वर्ग संस्थानों से जुड़ाव रखता था लेकिन छात्रवृत्ति घोटाले के बाद निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों की पहचान घोटालेबाजों के तौर पर हो रही है। ऐसे में शिक्षण संस्थानों को लेकर आमजन के जेहन में गलत छवि बन रही है। संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर भर में इसी घोटाले को लेकर ही चर्चा हो रही है। हर कोई हैरान है कि इतनी बड़ी रकम छात्रवृत्ति के नाम पर कैसे कैसे हड़प ली गई।