आग की घटनाओं के डेढ़ सौ का आंकड़ा पार करने के बाद अब शासन को जंगलों से चीड़ का पेरुल हटाने की याद आई है। तकरीबन तीन करोड़ टन पेरुल जंगलों में पटा पड़ा है। चार साल से इसे हटाया नहीं गया।
पेरुल से जैव ईंधन और बिजली बनाने की योजना दो साल साल पहले बनी था, लेकिन ठंडे बस्ते में चली गई। अब शासन पेरुल से जैव ईंधन, बिजली बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
पेरुल से बायो ईंधन, बिजली आदि बनाए जाने से संबंधित ड्राफ्ट पर मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह 6 मई को अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। शासन इस पर नीति तैयार करने पर विचार कर रहा है।
चार साल पहले तैयार किया था जैव ईंधन तैयार करने संबंधी ड्राफ्ट
वैकल्पिक ऊर्जा विभाग ने पेरुल से जैव ईंधन तैयार करने संबंधी ड्राफ्ट चार साल पहले तैयार किया था। इस पर 8 सितंबर 2014 को ड्राफ्ट पर वनाधिकारियों और वैकल्पिक ऊर्जा विभाग के अफसरों की बैठक हुई थी।
बैठक के बाद ड्राफ्ट ठंडे बस्ते में चला गया। अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने बताया कि इस दिशा में कुछ काम हुआ था लेकिन कीमत अधिक आने की वजह से इसने गति नहीं पकड़ी।
अब इस मामले में विचार-विमर्श के बाद ऐसी नीति बनाई जाएगी जिससे आसानी हो जाए। इस नीति के सफल होने पर पेरुल की खपत बढ़ जाएगी। पेरुल से जंगलों को आग का खतरा कम हो जाएगा।