शरदपूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि बड़ा महत्व है। इस रात को भी लक्ष्मी जी पृथ्वी लोक का भ्रमण करती है। इस रात को उन्हें जागृति और भजन कीर्तन करता हुआ लक्ष्मी जी उसे धन धान्य से परिपूर्ण कर देती है।
कहा जाता है कि यदि रात को इसकी रोशनी में खीर को फैला कर रख दिया जाए तो वह अमृत समान हो जाती है। शुक्रवार को शरदपूर्णिमा है। इस दिन रात को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। चंद्रमा की रोशनी भी अधिक होता है।
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धार्मिक दृष्टि से यह रात है बेहद महत्वपूर्ण
उसका रुप बेहद आकर्षक और लुभावना होता है। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश शुक्ला ने बताया कि धार्मिक दृष्टि से यह रात बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इस रात को जो व्यक्ति पूरी रात सच्चे मन से पूजा अर्चना करता है। उसकी इच्छाएं पूर्ण होती है। घर में सुख शांति और धन संपत्ति आती है। कहा जाता है कि लक्ष्मी जी इस रात पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं।
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उन्हें इस दौरान जो भी मनुष्य पूजा पाठ और भजन कीर्तन करता दिखाई देता है। वह उससे प्रसंन्न होती है और उसे धन धान्य से परिपूर्ण कर देती है।
चंद्रमा के प्रकाश में रखा जाए
इसके अलावा यदि इस रात को खीर बनाकर उसे फैलाकर चंद्रमा के प्रकाश में रखा जाए तो चंद्रमा की किरणे उसे अमृत समान कर देती है। सुबह के समय प्रशाद के रुप में इस खीर कर सेवन करने से मनुष्य निरोगी हो जाता है। उसे अच्छा स्वास्थ्य मिलता है।