जमीन की सेहत परखने के लिए शुरू किए गए मृदा परीक्षण के बाद किसानों का मृदा परीक्षण कार्ड दिया जाना चाहिए। साथ ही आनलाइन व्यवस्था की जाए ताकि किसान नेट पर जाकर अपनी जमीन से जुड़ी जानकारियां हासिल कर सके।
हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्रालय में हुई कृषि मंत्रियों और निदेशकों की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया। बताया गया कि उत्तराखंड समेत कई राज्यों ने जीपीएस प्रणाली के जरिये मृदा परीक्षण शुरू भी कर दिया है।
किसानों को दी जाएगी जानकारी
उक्त बैठक में राज्य के कृषि निदेशक गौरीशंकर आर्य शामिल हुए। आर्य के मुताबिक, गाइड लाइन में यह भी कहा गया है कि मृदा परीक्षण करते समय किसानों को जमीन में फास्फोरस, नाइट्रोजन और पोटाश के अलावा बोरान, सल्फर और जिंक जैसे अति सूक्ष्म कृषि पोषक तत्वों के बारे में भी जानकारी दी जाए।
कृषि निदेशक के मुताबिक, जमीनों का स्वास्थ्य परीक्षण हो सके इसके लिए राज्य के सभी 13 जिलों में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला संचालित करने के साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं में दो क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। राज्य के नौ लाख 12 हजार किसानों में से पांच लाख किसानों की जमीनों का मृदा परीक्षण किया जा चुका है।