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सूखे जलस्रोत फिर बुझाएंगे सबकी प्यास

Mon, 25 Feb 2013 11:41 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल किल्लत को दूर करने की दिशा में एक और ठोस कदम बढ़ाया गया है। सूख गए जलस्रोतों को रिचार्ज करने और जल प्रबंधन के मकसद से देहरादून में स्थापित आईसोटोप हाइड्रोलॉजी सेंटर का रविवार को विधिवत शुभारंभ किया गया।
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सेंटर की स्थापना भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) और हिमालयन पर्यावरणीय अध्ययन एवं संरक्षण संस्थान (हेस्को) के सहयोग से किया गया है। यहां स्थापित लैब के माध्यम से पानी के नमूनों का परीक्षण कर सूख चुके जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने का काम किया जाएगा। बाद में इसका रखरखाव भी किया जाएगा। अभी तक जलस्रोतों के नमूने मुंबई स्थित लैब में भेजे जाते थे। इसमें खर्च ज्यादा होने के साथ समय भी काफी लगता था।
 
शुक्लापुर स्थित हेस्को परिसर में सेंटर का उद्घाटन केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार आर चिदंबरम और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष आरके सिन्हा की मौजूदगी में किया गया। चिदंबरम ने इस मौके पर कहा कि विज्ञान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है।
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डॉ. आरके सिन्हा ने लैब से होने वाले लाभ और आगामी योजनाओं के बारे में बताया। पर्यावरणविद डॉ. सुंदरलाल बहुगुणा ने जल त्रासदी से निपटने को हिमालय को बचाने पर जोर दिया। हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि जल संकट दूर करने को सुदृढ़ उपाय जरूरी हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि लैब से राज्य को खासा लाभ मिलेगा। इस अवसर पर बार्क के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. गुरुशरण ने आईसोटोप हाइड्रोलॉजी के संदर्भ में जानकारी दी।

क्या है तकनीक
आईसोटोप तकनीक से जल में पाए जाने वाले तत्वों का अध्ययन कर जलस्रोतों के रिचार्ज जोन का पता लगाया जा सकता है। इस तकनीक में मुख्य रूप से लिक्विड वाटर आईसोटोप एनालाईजर द्वारा जल में पाए जाने वाले आक्सीजन और हाईड्रोजन आईसोटोप का पता लगाया जाता है। इससे भूमिगत पानी की रासायनिक संरचना मालूम की जाती है। इससे जलस्रोतों को रिचार्ज करने में मदद मिलती है। इस सेंटर में भविष्य में जलस्रोत न सूखें, इसकी भी कोशिश भी की जाएगी।

110 जलस्रोतों पर चल रहा है काम
इस तकनीक के जरिये हिमाचल और उत्तराखंड के 110 जलस्रोतों पर काम चल रहा है। मुंबई की लैब में अभी तक जितने नमूने ले जाए गए उनके जरिए करीब 16 जलस्रोतों में फिर से पानी आ गया है। पूरे प्रदेश में 30 प्रतिशत जलस्रोत सूख चुके हैं, जबकि 45 प्रतिशत सूखने के कगार पर हैं। इन्हें रिचार्ज करने और बचाने की दिशा में अब काम हो सकेगा।
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