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उत्तराखंडः राहत केंद्रो में कैद नौनिहालों की उमंग

Mon, 01 Jul 2013 05:26 PM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
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उत्तराखंड में आई दैवी आपदा ने नंहे कदमों पर भी बेडियां डाल दी हैं। देशभर में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद आज से स्कूल खुल गए हैं, लेकिन उत्तराखंड के कई इलाकों में अभी नौनिहालों को चारदीवारी में ही कैद रहना होगा।
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स्कूल खुलने की उमंग और नई कक्षा का शोरगुल तो आपदा के चलते बंद हो ही गया कई इलाकों में अगले दो महीने तक भी सुचारू रूप से स्कूल चलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

कुछ स्कूलों में बाढ़ पीड़ित हैं तो कुछ राहत सामग्री के गोदाम बने हुए हैं। उत्तराखंड के सीमांज जिलों में सड़कें और संपर्क मार्ग तबाह हो गए हैं। ऐसे में स्कूलों तक पहुंचने के हालात नहीं बन पा रहे हैं। जिससे सरकारी मशीनरी से ज्यादा नौनिहाल परेशान हैं।
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आपदा के कारण उत्तरकाशी जिले में 9 जुलाई तक स्कूल बंद रहेंगे। बाढ़ में अपने घर गवां चुके पीड़ित जिला मुख्यालय और आसपास के स्कूलों में बनाए गए राहत शिविरों में रह रहे हैं। जिससे यहां पठन-पाठन शुरू हो पाना मुश्किल है।

राहत केन्द्रों में कैद नौनिहाल
तिलोथ पुल तथा मनेरा वाली सड़क ध्वस्त होने से स्कूली बच्चों के सामने आवाजाही की समस्या है। अधूरे बने केदारघाट झूला पुल से स्कूली बच्चों की आवाजाही जोखिम भरी है।

गंगोत्री राजमार्ग इस कदर तबाह है कि बीआरओ इस पर हल्के वाहनों की आवाजाही 30 अगस्त तक शुरू कर पाने की बात कह रहा है। ऐसे में स्कूल खुलने की संभावनाओं को लेकर शिक्षक-अभिभावक और छात्र परेशान हैं।

बहरहाल अभी तो आपदा राहत केन्द्र ही नौनिहालों की कक्षाएं बनी हुई हैं और आपदा नया अध्याय, जिसने कई नंहे-मुन्नों को समय से पहले ही बेहद कड़वे अनुभव से गुजरने को विवश कर दिया।

क्या कहते हैं अधिकारीः
'फिलहाल 9 जुलाई तक स्कूलों की छुट्टी है। जिला मुख्यालय के नौ राहत शिविरों में सात सौ से अधिक बाढ़ पीड़ित ठहरे हैं। गंगोत्री राजमार्ग पर दो महीने तक यातायात बहाल होना मुश्किल है। छुट्टी समाप्त होने के बाद किसी भी तरह स्कूल खुलवाने की व्यवस्था की जाएगी।'
डा.आर.राजेश कुमार, डीएम उत्तरकाशी।

'राहत शिविरों के अलावा कई स्कूलों में राहत सामग्री भी स्टोर की गई है। हालात विकट हैं, ऐसे में आपदा प्रभावित क्षेत्र के स्कूलों में पठन-पाठन शुरू करा पाना काफी मुश्किल है।'
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परशुराम वर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी।
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