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उत्तराखंड में जारी है 'डर्टी' पॉलिटिक्स 

Mon, 11 Apr 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • प्रवासी उत्तराखंडी प्रदेश के ताजा सियासी हालात से बेहद आहत 
  • बोले, 16 सालों में नेताओं ने प्रदेश का नहीं खुदा का किया विकास
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पत्रकार सम्मेलन - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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प्रवासी उत्तराखंडियों ने रविवार को प्रेस क्लब सभागार में मीडिया के सामने प्रदेश के ताजा हालत के लिए डर्टी पॉलिटिक्स को जिम्मेदार ठहराया। इन लोगों ने आरोप लगाया कि 16 सालों में राज्य के नेताओं ने प्रदेश के बजाय अपना विकास ज्यादा किया है। उन्होंने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडी अपने-अपने व्यवसाय, नौकरी आदि में सर्व सम्पन्न हैं। पर प्रदेश का विकास नहीं होने का दर्द हमेशा की तरह आज भी परेशान करता है। 
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वरिष्ठ पत्रकार केशर सिंह बिष्ट ने कहा कि मुंबई में उन्हें कहीं भी आते-जाते समय अपना परिचय देने पर दिक्कत होती है। पर हमारी व्यावसायिक मजबूरी है कि हम मुंबई में हैं। हमें राज्य से कुछ नहीं चाहिए पर बड़ा दु:ख होता है जब राज्य के बारे में बुरी खबरें सामने आती हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश के नेताओं ने कभी प्रवासी उत्तराखंडियों की वापसी के लिए प्रयास नहीं किए। 

प्रवासी उत्तराखंडियों ने कहा कि प्रदेश में 16 सालों में आठ मुख्यमंत्री बनाना राज्य के विकास की हकीकत खुद बयां करता है। इन लोगों का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि हमें अपना निजी स्वार्थ छोड़कर जनता का स्वार्थ पूरा करने की बात करनी चाहिए। बिष्ट मुंबई में कई बड़े-बड़े फिल्मकारों से मिलते रहते हैं। 
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‘रेज योर वाइस: वी अगेंस्ट डर्टी पालटिक्स’

पत्रकार सम्मेलन - फोटो : amar ujala
हमारा प्रदेश बहुत सुंदर प्रदेश है लेकिन यहां डर्टी पालटिक्स चल रही है। ‘रेज योर वाइस - वी अगेंस्ट डर्टी पालटिक्स’ कार्यक्रम में हस्तक्षेप साझा संघर्ष के बैनर तले बिष्ट विभिन्न वर्ग के बुद्धिजीवियों को संबोधित कर रहे थे। वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी ने कहा कि पहाड़ को सही दिशा और दशा देने वाला नेता ही देवभूमि का विकास कर सकता है। 

चंडीगढ़ से आई पहाड़ी रसोई चला रही निधि उनियाल ने कहा कि हमें भी राज्य के प्रति असंवेदनशील नेताओं की सोच से घृणा होती है। हम सब संपन्न और बुद्धिजीवी लोग आगे भी प्रदेश के विभिन्न जगहों पर ऐसे चिंतन शिविर द्वारा जनता को जागरूक करते रहेंगे। उन्होंने प्रदेश की दशा और दिशा पर करीब तीन-चार घंटे तक चिंतन मनन किया। इस दौरान तन्मय मंमगई, 

पहाड़ी रसोई ने परोसे पहाड़ी व्यंजन
ठेठ पहाड़ी अंदाज में नौगांव उत्तरकाशी से आई महिलाओं ने पहाड़ी रसोई बनाकर प्रेस क्लब में आये सभी आगंतुकों को खिलाए। महिलाओं ने रवाईं के पारंपरिक व्यंजन सिडे जो कि फाइड मोमोज की तरह बनते हैं सहित उड़द के पकोड़े, राजमा-चावल आदि आगंतुक व प्रवासी उत्तराखंडियों को पेश किए। चंडीगढ़ निवासी निधि उनियाल डंगवाल ने कहा कि वह देशभर में कई जगह रही लेकिन अपनी परंपराओं को आज भी साथ लेकर चलती हैं। 
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