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महामहिम के सामने महिला से ये कैसा सुलूक कर डाला!

Wed, 20 Apr 2016 04:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • - भाजपा की दो महिला पार्षद राज्यपाल से मिलने को जूझती रही 
  • -सुरक्षाकर्मी ने हाथ पकड़कर पीछे धकेल दिया
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राज्यपाल से बात करने की कोशिश करती पार्षद - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राष्ट्रपति शासन और निर्वाचित सरकार का अंतर मंगलवार को राज्यपाल के फ्लाईओवरों के निरीक्षण के दौरान सामने आया। जो जनप्रतिनिधि सीएम व मंत्रियों के काफिले के सामने खड़े होकर अपनी बात रखे बिना नहीं मानते थे वह राज्यपाल तक अपनी बात रखने के लिए जूझते रहे। मामला है दो भाजपा महिला पार्षदों अमिता सिंह और शारदा गुप्ता का। 
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यह दोनों राज्यपाल के समक्ष फ्लाईओवरों को लेकर अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए समर्थकों को साथ लेकर पहुंची थी। राज्यपाल का काफिला जैसे बल्लीवाला चौराहे पर पहुंचने वाला था इनमें से एक पार्षद शारदा गुप्ता ने अपने समर्थकों के साथ राज्यपाल की कार को हाथ देकर रोकने की कोशिश की। 

राज्यपाल से मिलने को जूझती रहीं महिला पार्षद

राज्यपाल से अपनी बात कहने की जद्दोजहद करती महिला पार्षद। - फोटो : AmarUjala
पार्षद को पुलिस अधिकारी समझाते रहे, लेकिन वह सुरक्षा घेरे से निकल कर काफिले तक पहुंच गई।

यह अलग बात है कि राज्यपाल ने भीड़ को देखकर गाड़ी नहीं रोकी और निर्धारित कार्यक्रम के तहत बल्लीवाला फ्लाईओवर के निरीक्षण स्थल पर पहुंच गए। उनके पहुंचते ही दोनों पार्षद अपने समर्थकों के साथ राज्यपाल से अपनी मांग रखने की जिद करने लगी।

राज्यपाल तक पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा कर्मियों ने लाख कोशिश की, लेकिन दोनों पार्षद बाहरी सुरक्षा घेरे को लांघने में कामयाब रही। राज्यपाल जब बाहर आईएसबीटी फ्लाईओवर निरीक्षण के लिए निकलने लगे तो पार्षदों ने हो हल्ला मचा दिया।
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राज्यपाल के सुरक्षा कर्मी ने हाथ पकड़कर धकेल दिया

केके पॉल - फोटो : AmarUjala
राज्यपाल कुछ देर के लिए रुक गए लेकिन महिलाओं ने अपनी बात पुरजोर तरीके से रखने की कोशिश की। इसपर राज्यपाल के एक सुरक्षाकर्मी ने महिला पार्षद को करीब जाने से रोकने के लिए उनका हाथ पकड़ कर पीछे धकेल दिया।

एक उच्च पुलिस अधिकारी के अनुसार वीवीआईपी सुरक्षा की ड्रिल में यह तय है कि क्लोज प्रोटेक्शन थीम के तहत अगर कोई सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश करे तो उसको रोका जाना है, लेकिन एक सवाल तो है कि सुरक्षाकर्मी ही सही किसी महिला को इस तरह से हाथ पकड़कर धकेलना कहां तक उचित है? अगर सामान्य अवस्था में ऐसा होता तो क्या मामला लज्जा भंग का नहीं बन जाता? 
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