उत्तराखंड में आपदा से उद्योंगो को हुए भारी नुकसान से उबारने के लिए छिटपुट काम शुरु हो गया है। बैंकों ने आपदाग्रस्त इलाकों में बर्बाद छोटे-मझौले उद्योगों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। अधिकारियों की मानें तो इन्हें दिए गए कर्ज का पुनर्गठन बीमार इकाईयों की तर्ज पर हो सकता है। बैंकों की शाखाओं केमाध्यम से बर्बाद इकाईयों के मूल्यांकन के पश्चात एक समिति कर्ज पुनर्गठन का कार्य करेगी।
उधर, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड की मानें तो आपदा में तबाह छोटे-मझौले उद्योगों का आंकड़ा नए अनुमान के अनुसार 19 हजार से ऊपर पहुंच गया है। वह भी केवल रजिस्टर्ड माइक्रो और स्माल इंडस्ट्रीज का। नुकसान का आंकड़ा भी साढ़े पांच सौ करोड़ से अधिक जा पहुंचने का अनुमान है।
शून्य करने की भी हो सकती है कोशिश
'शाखाओं से नुकसान का ब्योरा भेजने को कहा गया है। कर्ज को विशेष श्रेणी में रख आवश्यकता के लिहाज से शून्य करने की कवायद भी की जा सकती है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के नुमाइंदों से भी डाटा का भी इंतजार कर रहे हैं।'
अशोक अनेजा, मंडल प्रमुख, पंजाब नेशनल बैंक
नुकसान का किया जा रहा आंकलन
'नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। इसके बाद ही कर्ज पुनर्गठन की प्रक्रिया के बारे में कुछ किया जा सकता है। कर्ज शाखाओं केमाध्यम से दिया गया है। इसका ब्योरा जुटाने में वक्त लग सकता है।'
महावीर रावत, क्षेत्रीय प्रबंधक, स्टेट बैंक आफ इंडिया