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गेट सिस्टम होता तो न फंसते इतने लोग

Mon, 01 Jul 2013 11:14 AM IST
ऋषिकेश/ब्यूरो
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बदरीनाथ धाम में इस साल वाहनों का गेट सिस्टम समाप्त नहीं होता तो आपदा के बाद हजारों श्रद्धालुओं के धाम में फंसने की नौबत नहीं आती।
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भोजन और ठहरने के पर्याप्त प्रबंध की अनदेखी करते हुए शासन और प्रशासन द्वारा दशकों से चले जा रहे सिस्टम को इस साल समाप्त कर दिया गया।

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नतीजतन नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने के बाद करीब 12 हजार से अधिक श्रद्धालु धाम में फंसे रह गए। अधिक संख्या के कारण ही उन्हें आपदा के 13 दिन बाद भी पूरी तरह से नहीं निकाला जा सका है।

एक अनुमान के मुताबिक आपदा के कारण बदरीनाथ से जोशीमठ, पांडुकेश्वर के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग के बाधित होने के समय धाम में करीब 20 हजार लोग मौजूद थे। जिनमें करीब छह से सात हजार की संख्या मंदिर समिति के कार्मिकों, पंडे-पुजारियों और होटल आदि कारोबारियों की बताई जा रही है।
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रात में भी जारी थी आवाजाही
नियमानुसार पहाड़ों पर शाम छह बजे के बाद वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है, मगर गेट सिस्टम फ्री होने के कारण धाम में रात में भी यात्री वाहनों की आवाजाही जारी रखी गई। जिससे आपदा से मार्ग अवरुद्ध होने पर तीर्थयात्रियों को धाम में फंसना पड़ा।

इसके बाद प्रशासन द्वारा फंसे यात्रियों के ठहरने और भोजन के लिए भी पर्याप्त प्रबंध नहीं किया गया।

धाम से लौटे जिला छतरपुर, मध्यप्रदेश के चन्नू कुशवाहा, जिला ठाणे, मुंबई के त्रिवेंद्र सिंह, आगरा, उप्र के मनोज कुमार ने बताया कि प्रशासन द्वारा धाम में फंसे यात्रियों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिससे उन्हें किसी तरह से दिन काटने पड़े।

चारों धामों में हो गेट सिस्टम
चारधाम यात्रा से जुड़े लोगों का कहना है कि वाहनों के धामों तक जाने के लिए गेट सिस्टम न सिर्फ बदरीनाथ धाम, बल्कि चारों धामों में लागू किया जाना चाहिए। वह यात्रियों की सुरक्षा के साथ ही उनके लिए पर्याप्त सुविधा के लिहाज से भी इसे जरूरी बताते हैं।

बदरीनाथ में फंसे थे 12 हजार यात्री
लोकल रोटेशन के अध्यक्ष मनोज ध्यानी का कहना है कि जोशीमठ और पांडुकेश्वर में गेट सिस्टम समाप्त करने से ही रोड बंद होने पर बदरीनाथ में 12 हजार के लगभग यात्री फंसे। यदि गेट सिस्टम बहाल होता तो पचास फीसदी लोग ही धाम में फंसते।

जिनके रहने और भोजन का प्रबंध आसानी से किया जा सकता था। उनका कहना है कि गेट सिस्टम चारों धामों में होना चाहिए।

गेट सिस्टम बेहद जरूरी
संयुक्त रोटेशन के प्रशासनिक अधिकारी बृजभानू प्रकाश गिरि का कहना है कि गेट सिस्टम समाप्त होने पर पूर्वाह्न 10 और 11 तक ऋषिकेश से रवाना होने वाले वाहन भी रात को बदरीनाथ पहुंच रहे थे, जबकि गेट सिस्टम में शाम साढ़े चार बजे के बाद वाहनों को धाम के लिए नहीं छोड़ा जाता था।
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उनका कहना है कि ऐसा करने से यात्रियों की सुरक्षा के साथ ही व्यवस्था की भी अनदेखी की गई, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

क्या कहते हैं अफसर
इस साल गेट सिस्टम को समाप्त कर दिया गया था। ऐसा वाहनों की अधिकता के कारण जोशीमठ में लगने वाले जाम की दृष्टि से किया गया। रात साढ़े आठ से नौ बजे तक ही इसमें छूट दी गई, वर्तमान स्थितियों का पता होता तो शायद ऐसा नहीं करते।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी चमोली
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