धूमधाम से बारात पहुंची और बेटी पूरे रस्मों रिवाज के साथ विदा हुई। गांव वाले भी परिवार की खुशियों में शामिल हुए और नम आंखों से बेटी को विदा किया।
कुछ माह बाद पता चलता है कि यह शादी नहीं बेटी को बेचने और खरीदने के लिए रचा गया ड्रामा था।
उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में कुछ ऐसे ही ह्यूमन ट्रैफिकिंग हो रही है। इनमें से ज्यादातर लड़कियों को देह व्यापार के नरक में धकेल दिया जाता है।
चिंता की बात यह है इन मामलों में पिता ने खुद चंद रुपयों के लालच में बेटी को हैवानों के हवाले कर दिया।
देहरादून में आयोजित तीन दिवसीय एंटी हृयूमन ट्रैफिकिंग वर्कशॉप में ऐसे मामलों के बढ़ने पर चिंता जताई गई।
अधिकारियों के अनुसार ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के बाद मानव तस्करी दुनिया के लिए बड़ी समस्या बनकर उभरी है।
उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं। एसटीएफ की हृयूमन ट्रैफिकिंग सेल के सर्वे के मुताबिक पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत जिले इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
गढ़वाल रेंज में चमोली के सीमांत गांव, उत्तरकाशी, जौनसार बावर और टिहरी में मामले बढ़ रहे हैं।
हृयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट में तस्करों पर शिकंजा कसा तो उन्होंने भी रणनीति बदल दी। अधिकारियों के अनुसार, तस्कर अब सीधे युवतियों को उनके परिजनों से नहीं खरीदते। एजेंट के माध्यम से डील की जाती है।
डील तय होने के बाद गैंग के एक युवक को दूल्हा बनाया जाता है। फिर रस्मों रिवाज के साथ शादी होती है, ताकि शक की कहीं कोई गुंजाइश न रहे।
- तस्करों ने रणनीति बदली है। हमने गौचर और कई स्थानों पर बारातियों को पकड़ा तो पता चला कि वह तस्कर थे। यह तस्कर अधिकांश हरियाणा, यूपी और दिल्ली से होते हैं।
-पुष्कर सिंह सैलाल -डीआईजी सीआईडी (नोडल आफिसर, हृयूमन ट्रैफिकिंग)
पकड़े जा चुके हैं कई मामले
शादी की आड़ में बेटियों की खरीदने-बेचने के कई मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2010 में टिहरी के थौलधार ब्लाक के मैंडखाल निवासी एक व्यक्ति ने बेटी का रिश्ता मेरठ निवासी युवक से तय किया था।
शादी हरिद्वार में होनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर लड़की ने शादी से इनकार कर दिया।
पता चला कि बाप ने मोटी रकम लेकर बेटी का सौदा किया था। मामला खुला तो लोग सड़कों पर उतर आए। मामले में पुलिस ने मेरठ के पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।
इसके अलावा वर्ष 2011 में गोपेश्वर पुलिस ने गौचर में तस्करों की बारात को पकड़ा था।
वर्ष 2011 में ही एनजीओ की मदद से एंटी हृयूमन यूनिट ने टनकपुर में शादी कर चुकी एक युवती को बचाया था। वर्ष 2012 में टिहरी में भी कई ऐसे मामले पकड़े जा चुके हैं।