हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात की यात्रा कैसे होगी, अभी इस पर ही सवालिया निशान लगे हुए हैं। नंदा की विदाई के लिए ग्रामीणों का 12 साल का इंतजार अब निराशा में बदलने लगा है।
मां नंदा के धाम कुरुड़ से ही यात्रा मार्ग तहस-नहस पड़े हैं। आपदा से कुरुड़ गदेरे पर बनी पुलिया बह गई है, जिससे कुंडबगड़, चरबंग तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को गदेरा पार करना पड़ रहा है।
28 अगस्त को सिद्धपीठ कुरुड़ से मां नंदा की डोली वाण के लिए प्रस्थान करेगी। इसी मार्ग से होकर दशोली की मां नंदा की डोली भी कनोल पहुंचेगी, लेकिन यात्रा मार्ग पैदल चलने लायक नहीं है।
पहला पड़ाव ही डैमेज
पहले पड़ाव से ही पैदल मार्ग ध्वस्त पड़े हैं। यहां चरबंग से धरगांव, घाट बाजार और उस्तोली पैदल मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त पड़ा है। घाट बाजार में चुफलागाड़ से पैदल आवागमन की पुरानी पुलिया क्षतिग्रस्त है।
जिला पंचायत द्वारा घाट-उस्तोली, सरपाणी-लांखी के मध्य करीब 500 मीटर तक खड़ंजा निर्माण कार्य किया गया था, जिसका अब नामोनिशान ही मिट गया है।
घाट बाजार से उस्तोली तक मोटर मार्ग भी करीब आधा किमी तक बह गया है। सड़क बहने पर ग्रामीणों द्वारा वैकल्पिक पैदल मार्ग का निर्माण किया गया है।
इनकी भी सुनिएः
नंदा राजजात यात्रा को निर्विघ्न संपन्न कराना अब चुनौती भरा कार्य हो गया है। सरकारी मशीनरी को यात्रा शुरू होने से पूर्व क्षतिग्रस्त रास्तों को ठीक कर देना चाहिए। मां नंदा की डोली जिन-जिन पड़ावों से होकर गुजरेगी, वहां-वहां रास्तों को अभी तक ठीक करने का कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है।
-मंशाराम गौड़, अध्यक्ष, सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति।
राजजात यात्रा के आयोजन को सूक्ष्म करने की अपील की गई है। पड़ावों की स्थिति देख इस बार यात्रा आयोजित करना जोखिम भरा ही होगा। लिहाजा यात्रा को आगामी वर्षों में किया जा सकता है। वैसे भी राजजात का कोई निश्चित समय नहीं होता है।
-अरुण मैठाणी, महामंत्री, नंदा राजजात जिला आयोजन समिति।
राजजात यात्रा के पड़ावों की स्थिति सुधारी जा रही है। घाट क्षेत्र से गुजरने वाली यात्रा के रास्तों को 25 अगस्त तक चाक-चौबंध कर दिया जाएगा।
-मदन सिंह ह्यांकी, अधीक्षण अभियंता, लोनिवि, चमोली।