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उत्तराखंड में प्रसिद्घ धाम में दरक रही पहाड़ी, बड़ा खतरा

Thu, 28 Apr 2016 03:29 PM IST
राजेश देउपा/ अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
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पूर्णागिरि
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मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की दरकती पहाड़ी खतरनाक स्थिति में पहुंचती जा रही है, लेकिन पहाड़ी के ट्रीटमेंट की योजना नौ साल से टहल रही है।
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लोनिवि और पर्यटन विभाग के हाथ खड़े करने के बाद न सिर्फ ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट (यूडीआरपी) को सौंपी गई है, बल्कि इसके लिए मिला बजट भी शासन को लौटा दिया गया है। अब यूडीआरपी एजेंसी इस प्रोजेक्ट की नए सिरे से डीपीआर तैयार कर रही है।

मां सती के नाभी स्थल के रूप में विख्यात मां पूर्णागिरि धाम टनकपुर के उत्तर दिशा की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित है, जहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। देश के कोने-कोने के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोगों की आस्था इस धाम से जुड़ी है।
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एक दशक से धीरे-धीरे दरक रही है पहाड़ी

मां पूर्णागिरि धाम
वहीं, पौराणिक काल से स्थापित धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी बीते एक दशक से धीरे-धीरे दरक रही है। धाम के पुजारी, व्यापारी और प्रशासन को आस्था के इस केंद्र से कमाई की चिंता तो हैं, लेकिन इसके बचाव को लेकर वे कतई गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। नौ साल पहले पहाड़ी के ट्रीटमेंट की पहल हुई थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है।

जिला प्रशासन ने पहाड़ी पर लोड कम करने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन पहाड़ी के ट्रीटमेंट की योजना अब भी इधर से उधर टहलाई जा रही है। शासन ने 2007 में लोनिवि को ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी सौंपते हुए 54.15 लाख रुपये का बजट दिया था।

पांच साल तक यह बजट लोनिवि के खाते में डंप रहा और बाद में कुमाऊं मंडल विकास निगम को ट्रांसफर कर दिया गया। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने भी हाथ खड़े किए तो बजट फिर लोनिवि को ट्रांसफर किया गया। चूंकि लोनिवि पहले ही हाथ खड़े कर चुका था, लिहाजा अब ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी नौ साल बाद यूडीआरपी नामक संस्था को सौंपी गई है। लोनिवि के ईई बीसी पंत का कहना है कि विभाग ने इस प्रोजेक्ट का बजट शासन को लौटा दिया है।

नई कार्यदायी एजेंसी यूडीआरपी पहाड़ी के ट्रीटमेंट की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्टर रिपोर्ट) तैयार कर रही है। नई डीपीआर के अनुरूप शासन से बजट अवमुक्त होने के बाद ट्रीटमेंट का कार्य शुरू होगा।
- नरेश दुर्गापाल, एसडीएम
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