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पहाड़ और बॉर्डर पर कोरोना को मात देने के लिए सुरक्षा बलों ने खड़ी की सोशल डिस्टेंसिंग की अभेद्य दीवार

Thu, 09 Apr 2020 07:57 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, पिथौरागढ़, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके, किन्नौर घाटी, जोशीमठ और श्रीनगर सहित अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जहां के ग्रामीणों के साथ मिलकर सुरक्षा बलों ने कोरोना को हराने के लिए एक अभेद दीवार खड़ी कर दी है।
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ITBP at Uttrakhand - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कोरोना वायरस का संक्रमण आगे न बढ़े, इसके लिए केंद्र और राज्यों ने पूरी ताकत लगा दी है। सरकार की इस तैयारी में सुरक्षा बल भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बल आईटीबीपी, बीएसएफ और सीआरपीएफ ने कोरोना को हराने के लिए खास तैयारी की है। पहाड़, बॉर्डर और जंगल में कोरोना की लड़ाई में लोगों को साथ लिया गया है।

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वहां की अधिकांश आबादी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन इस तरह करती है कि जैसे वे सदियों से ऐसा करते आ रहे हों। अपने घरों के आसपास, राशन लेते वक्त और खेत खलियान में कुछ काम है तो वे सुरक्षा बलों द्वारा पढ़ाए गए पाठ को याद रखते हैं।

अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, पिथौरागढ़, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके, किन्नौर घाटी, जोशीमठ और श्रीनगर सहित अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जहां के ग्रामीणों के साथ मिलकर सुरक्षा बलों ने कोरोना को हराने के लिए एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी है।
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आईटीबीपी के जवान अपनी तैनाती वाले इलाकों में लगातार स्थानीय लोगों के संपर्क में हैं। वे उन्हें राशन, दवाएं और अन्य दैनिक जरूरतों का सामान उपलब्ध करा रहे हैं। अधिकांश इलाके ऐसे हैं, जहां पर पढ़े लिखे लोगों की संख्या बहुत कम है।

वहां पर कई तरह की बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव रहता है। कोरोना के बारे में उन्होंने सुना है, मगर बहुत ज्यादा नहीं जानते। आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडेय बताते हैं कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के अलावा अबूझमाड़ छत्तीसगढ़, ईटानगर, बसर, किन्नौर के गांव बतसेरी, पिथौरागढ़, उधमपुर और जोशीमठ आदि इलाकों में जवानों ने कोरोना को लेकर लोगों को पूरी तरह जागरूक कर दिया है।

उन्हें जरूरी संसाधन भी मुहैया कराए हैं। अपने घर के अलावा इलाके की सुरक्षा कैसे करनी है, बाहर के लोगों को कैसे रोकना है, उनकी सूचना सर्वप्रथम किसे देनी है, ये सब बातें बताई गई हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग का वे अच्छे से पालन कर रहे हैं। जब उन्हें राशन वितरण के लिए बुलाया जाता है तो स्पॉट पर वे करीब दो-दो मीटर की दूरी बनाकर खड़े होते हैं। इसी तरह वे जब अपने खेत खलियान या पशुओं को इधर उधर ले जाते हैं तो भी वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं।


सीआरपीएफ के डीआईजी एम. दिनाकरण बताते हैं कि देश के तकरीबन हर हिस्से में यह बल मौजूद है। बल के अधिकारी और जवान, लोगों को कोरोना के बारे में प्रेक्टिकल करके दिखाते हैं।

वे अपने आसपास का इलाका कैसे सैनिटाइज करें, यह जानकारी दी जाती है। राजबाग (श्रीनगर) में लोगों को बल की ओर से हर तरह की मदद दी जा रही है। केवल वहीं नहीं, बल्कि देश के हर हिस्से में जहां पर ये बल तैनात है, वहां पर लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग की एक अभेद दीवार बना ली है।

अब यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। वे लोग एक तय दूरी बनाकर आपस में चर्चा करते हैं। गांव में कोई बाहर का व्यक्ति तो नहीं आया है। गांव का कोई ऐसा व्यक्ति जो शहर में रहता हो और अब गांव आ गया हो, उसका नाम भी वे तुरंत बता देते हैं।

जवानों ने लोगों को राशन के अलावा कोरोना से बचाव के लिए मास्क प्रदान किए हैं।

बीएसएफ के गुवाहाटी फ्रंटियर ने भी सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब समझाया है। इनकी सोशल डिस्टेंसिंग को चेक भी किया गया। राशन लेने के बाद जब ये लोग अपने घर जाते हैं, तो रास्ते में दूसरे लोगों से दो मीटर की दूरी बना लेते हैं।

देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान इन लोगों तक रसद और अन्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। जब भी ये लोग राशन के लिए आते हैं तो बीएसएफ अधिकारी इन्हें पैकेट देने से पहले कोरोना से बचने के लिए नियमों की जानकारी देता है। महिलाएं और बच्चे भी अब लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब अच्छी तरह समझ गए हैं।

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