18 मार्च को हुए सियासी घमासान के बाद कांग्रेस हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। सावधानी का आलम यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे साकेत को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाने में पूरे तीन दिन का समय लिया।
बागियों के हर समर्थक को निशाने पर लेने से पार्टी के कमजोर होने का अंदेशा पार्टी को सता रहा है। इस स्थिति को देखते हुए बागी विधायकों के प्रति खुलकर सहानुभूति जता रहे उनके समर्थकों को ही निशाने पर लिया जा रहा है। इस काम को भी अनुशासन समिति को सौंपा गया है।
कांग्रेस अपनी तरफ से बागी नौ विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस की सभी इकाइयों को भंग कर चुकी है। इतना होने पर भी संगठन जिलाध्यक्षों, विधानसभा प्रभारियों, सह प्रभारियों को नहीं छेड़ा गया है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक इस मामले को लेकर पार्टी बदले की भावना के तहत काम करती हुई नहीं दिखना चाहती। साथ ही यह संकेत देना भी जरूरी है कि पार्टी के खिलाफ कदम उठाने वाले हर कांग्रेसी को बख्शा नहीं जाएगा।