चंपावत। बाराकोट क्षेत्र के लोगों के लिए आपदा भारी मुसीबत लेकर आई है। यहां 17 अक्तूबर से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों के ठीक न होने से लोगों की परेशानी बढ़ी है। तीन ग्रामीण क्षेत्रों के चार हजार से अधिक लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागीय लापरवाही से परेशान ग्रामीणों ने अब इस योजना की लाइनों की मरम्मत खुद कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह अधिकारी ने बताया कि रैघांव, बैड़ाबैड़वाल, लुवाकोट के लोग 17 अक्तूबर के बाद से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। आपदा में टूटी लाइन को विभागीय स्तर पर ठीक करने में हो रही देरी से परेशानी बढ़ी है। पानी ढो रहे हितेश अधिकारी, नारायण सिंह, भगवान सिंह, दिनेश सिंह, लक्ष्मण सिंह, नारायण सिंह, जीवन सिंह आदि ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त लाइन को ठीक करने के लिए श्रमदान भी शुरू किया है। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लंबी लाइन को ठीक करने में समय लग रहा है। पेयजल आपूर्ति के लिए आंशिक रूप से वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं।
इधर राज्य आंदोलनकारी परिषद के उपाध्यक्ष और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया ने पम्दा, सलना आदि गांवों में पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। ग्रामीणों के साथ सांकेतिक प्रदर्शन करने के बाद उन्होंने इसे लेकर जल निगम के अधिकारियों से आग्रह किया।
पानी को तरसे पाटी के लोग, ज्ञापन दिया
पाटी (चंपावत)। पाटी में न्यू कॉलोनी के लोग पेयजल समस्या से परेशान हैं। पेयजल किल्लत के चलते यहां के लोग दूरदराज से पानी ढोने के लिए मजबूर हैं। नाराज लोगों ने मंगलवार को एसडीएम को ज्ञापन भेज पेयजल व्यवस्था सुचारु करने की मांग की। ऐसा न होने पर तीन दिन के भीतर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
न्यू कॉलोनी के लोगों ने कहा कि यहां कई जगह लंबे समय से नलों में पानी नहीं टपका है जबकि इसी पेयजल लाइन के एक हिस्से में पानी की आपूर्ति हो रही है। ग्रामीणों ने कहा कि विभाग को समस्या बताने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ज्ञापन में व्यापार मंडल अध्यक्ष गोपेश पचौली, रंजना देवी, देवकी देवी, प्रेमा देवी, मंजू गहतोड़ी, महेश चंद्र, प्रहलाद सिंह लड़वाल आदि के हस्ताक्षर थे। एसडीएम रिंकू बिष्ट ने जल संस्थान के अधिकारियों को लाइन का मुआयना कर अविलंब इसे ठीक करने के निर्देश दिए हैं।
ये योजनाएं अभी नहीं हुईं ठीक
पेयजल निगम : सलना-पम्दा-बाराकोट, टुनकांडे, मनटांडे पेयजल योजना।
जल संस्थान : गड्यूड़ा, मजपीपल, ईजड़ा पेयजल योजना।