सतीश जोशी सत्तू
चंपावत। राज्य में सिडकुल की स्थापना के बावजूद पहाड़ी जिले चंपावत की धरती उद्योगों के लिए बंजर साबित हो रही है। जिला मुख्यालय में मिनी औद्योगिक आस्थान की स्थापना के 38 साल बाद भी औद्योगिक विकास की सूरत बदल नहीं पाई है। उद्योग लगाने के नाम पर लीज पर उपलब्ध कराई गई भूमि पर आवासीय मकानों का निर्माण किया जा रहा है। राज्य में सिडकुल की स्थापना से चंपावत जिले में भी उद्योगों के फलने-फूलने की उम्मीद जगी थी लेकिन यह उम्मीदें ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकीं।
वर्ष 1986 में उद्योग विभाग ने जिला मुख्यालय के पुनेठी छतार में मिनी औद्योगिक आस्थान बनाने के लिए तकरीबन पचास नाली भूमि अधिग्रहीत की थी। पुनेठी छतार स्थित मिनी आस्थान में 29 लोगों को विभाग ने 99 वर्ष के लीज पर प्लाट आवंटित किए थे लेकिन इनमें से अधिकतर उद्यमियों ने वहां आवासीय मकान खड़े कर उद्योग धंधों के विकास का सपना चकनाचूर कर दिया है।
समय-समय पर विभाग की ओर से निष्क्रिय उद्यमियों के प्लाट निरस्त करने की कार्रवाई की बात की जाती है, लेकिन इस कार्यवाही को अमलीजामा पहनाने की जरूरत आज तक किसी ने नहीं दिखाई है। संवाद
शासन के विचाराधीन हैं कई नए प्रस्ताव
चंपावत। जिले के नए स्थानों पर मिनी औद्योगिक आस्थान विकसित करने के लिए 48.98 हेक्टेयर भूमि के प्रस्ताव शासन के विचाराधीन हैं। इसमें कठुवापाती, गोशनी, टनकपुर, दियूरी, बिंडा तिवारी, खूना बोहरा, डैसली, मऊ, मंच, खेतार, सूखीढांग और बमनपुरी आदि स्थान शामिल हैं। उद्योग महाप्रबंधक दीपक मुरारी के अनुसार प्रस्तावित स्थलों पर उद्यमियों को उनके उद्योग के अनुरूप भूखंड आवंटित करने के साथ अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। संवाद