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Champawat: वागरा बारिल प्रजाति की मछली के प्रजनन में मिली सफलता, तीन वर्ष से कर रहे थे वैज्ञानिक अध्ययन

Sat, 16 Sep 2023 05:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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चंपावत के छीड़ापानी मत्स्य अनुसंधान केंद्र में स्थानीय प्रजाति वागरा बारिल। संवाद
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चंपावत जिला मुख्यालय में स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र छीणापानी के वैज्ञानिकों ने स्थानीय स्तर की वागरा बारिल मत्स्य प्रजाति के व्यापक उत्पादन को लेकर सफलता प्राप्त की है। केंद्र के वैज्ञानिकों ने तीन वर्षाे के अनुसंधान के बाद मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी सफलता हासिल की है।

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केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसंधान का लाभ उत्तर भारत के राज्यों में शीत जल मात्स्यिकी के माध्यम से काश्तकारों की आय बढ़ाने में मिलेगा। मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. किशोर कुणाल के अनुसार वागरा बारिल मछली की एक स्थानीय प्रजाति है। जिस पर तीन वर्ष तक वैज्ञानिकों की ओर से लगातार अध्ययन किया गया।

 पहले वर्ष में प्रजाति के विभिन्न जीव विज्ञान का अध्ययन किया गया, जिसमें मछली के प्रजनन काल की पहचान की गई और परिपक्वता के लिए आवश्यक तापमान की पहचान की गई। दूसरे वर्ष में उत्प्रेरण हार्मोन की विभिन्न खुराकों का उपयोग करके शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय भीमताल में प्रजनन का प्रयास किया गया। जिसमें आंशिक सफलता प्राप्त हुई और तीसरे वर्ष सितंबर के महीने में चंपावत केंद्र में सफलतापूर्वक प्रजनन किया गया।
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डॉ. प्रज्ञा दास के नेतृत्व में किया गया अनुसंधान कार्य
वागला बारिल मछली के प्रजनन तकनीक को विकसित करने में वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा दास के नेतृत्व में अनुसंधान कार्य किया गया। उनकी टीम में सह अन्वेषक डॉ.किशोर कुणाल, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. देवजीत शर्मा और डॉ. रितेश कुमार शामिल रहे।

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सजावटी मछली के रूप में भी पसंद की जाती है वागरा बारिल
चंपावत।भारत में देशी मछलियों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से कुछ प्रजातियां विशेष रूप से सजावटी मछलियां दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध हैं। इसमें वागरा बारिल प्रजाति की मछली भी शामिल है। चंपावत केंद्र के वैज्ञानिकों ने स्थानीय चल्थी नदी से वागला बारिल प्रजाति पर अनुसंधान कर हैचरी में बड़े पैमाने पर ब्रीडिंग में सफलता प्राप्त की है। संवाद
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