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महिलाएं डेरी उत्पाद बढ़ा कर सकेंगी माली हालत में सुधार

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बनबसा पचपकरिया में आयोजित गोष्ठी में नबार्ड के मुख्यमहाप्रबंधक डा. ज्ञानेंद्र मणि महिलाओं को दु - फोटो : TANAKPUR
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बनबसा (चंपावत)। डेरी उत्पादन और महिलाओं की आय में बढ़ोतरी के लिए बुधवार को प्राइमरी स्कूल पचपकरिया में गोष्ठी आयोजित की गई। नाबार्ड, देवभूमि निधि स्वायत्त सहकारिता और निधि संस्था पिथारागढ़ की इस संयुक्त गोष्ठी में देहरादून से आए नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) डॉ. ज्ञानेंद्र मणि ने महिलाओं को डेरी के माध्यम से आय बढ़ाने के उपाय बताए।
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उन्होंने दुधारु पशुओं के चारा, दाने का सही प्रयोग, समय पर टीकाकरण का सुझाव दिया। उन्होंने दूध के अन्य उत्पाद बना माली हालत सुधारने के उपाय बताए। डेरी में लगी महिलाओं को उन्होंने मछली पालने, मसाला उत्पादों से आय बढ़ाने के लिए कहा। बताया कि कोऑपरेटिव बैंक ग्रामीणों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। ग्राम प्रधानों को भी इसके लिए पहल करनी चाहिए।
नाबार्ड के सीजीएम ने डेरी में लगी महिलाओं को अपने आय-व्यय का ब्योरा रख लाभ, नुकसान का आकलन करने का सुझाव दिया। कहा कि ग्रामीण परिवार के प्रत्येक सदस्य खाली समय का सदुपयोग कर आय बढ़ाने के लिए कोई भी काम कर सकते हैं।
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नाबार्ड के एजीएम विकास जैन ने भी डेरी उत्पाद बढ़ाने के उपाय बताए। ग्राम प्रधान महेश मुरारी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी का संचालन निधि संस्था के निदेशक डॉ. सुनील पांडेय ने किया।
कार्यक्रम में पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक सचिव सुरेंद्र कुमार प्रभाकर, नाबार्ड के डीजीएम अमित पांडेय, प्रबंधक राजेश कन्याल ने सहयोग दिया। देवभूमि निधि स्वायत्त सहकारिता पचपकरिया की निदेशक सुनीता मुरारी ने बताया कि गोष्ठी आयोजन में क्षेत्र के पांच गांवों की डेरी और समूहों से जुड़ी करीब 400 महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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