दर्द निवारक, जीवन रक्षक दवाओं का इस्तेमाल युवा नशे के रूप में कर रहे हैं। बढ़ती शिकायतों के बाद एसडीएम ने दवा विक्रेताओं के साथ मीटिंग की। इसमें बिना पर्चे की शेड्यूल एच-1 दवाओं की बिक्री किसी भी हाल में न करने का निर्देश दिया गया, इसके अलावा दवाओं का पूरा लेखा जोखा रखने का भी निर्देश दिया गया है।
अभिभावकों और स्कूलों के शिक्षकों ने एसडीएम से शिकायत की थी कि छात्र कफ सिरप, दर्दनिवारक दवा आदि(शेड्यूल एच-1) का इस्तेमाल नशे के तौर पर कर रहे हैं। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया है। सोमवार को टनकपुर, बनबसा के दवा विक्रेताओं को बुलाया गया था। मीटिंग के बाद एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि कोई भी दवा विक्रेता बिना पर्ची के प्रतिबंधित दवाइयों को बेचते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
दवा विक्रेताओं को प्रतिबंधित दवाओं से जुड़ी जानकारी मसलन डॉक्टर का नाम, मरीज का नाम और दवा की डोज आदि का ब्योरा भी रखना होगा। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर दवा विक्रेताओं के बिक्री रजिस्टर को जांच के निर्देश भी दिए। बैठक में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचएस ह्यांकी, कोतवाल वीसी शर्मा के अलावा दवा विक्रेता मौजूद थे।
ड्रग इंस्पेक्टर है नहीं कैसे लगेगा अंकुश
प्रशासन ने प्रतिबंधित दवाओं की बिना पर्चे पर बिक्री पर अंकुश लगाने की रणनीति तो तय की है, लेकिन जिले में ड्रग इंस्पेक्टर ही तैनात नहीं है। बगैर ड्रग इंस्पेक्टर के प्रतिबंधित दवाओं की खुली बिक्री पर अंकुश लग पाएगा इसमें संदेह है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल का कहना है कि फिलहाल नशीली दवाओं की खुली बिक्री पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को सौंपी गई है, इसके साथ ही शासन से जिले में ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती के लिए भी पत्र भेजा जाएगा।